Air India CEO Resigns
Air India CEO Resigns : भारतीय विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एयर इंडिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, विल्सन अचानक पद नहीं छोड़ रहे हैं; वे तब तक अपनी सेवाएं जारी रखेंगे जब तक कि बोर्ड उनके उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लेता। सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह हुई बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि विल्सन सितंबर 2026 तक इस जिम्मेदारी को संभालते रहेंगे, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
कैंपबेल विल्सन सितंबर 2022 में पांच साल के अनुबंध पर एयर इंडिया के साथ जुड़े थे। यह वह दौर था जब टाटा समूह ने एयर इंडिया का कमान अपने हाथों में ली थी और एयरलाइन के निजीकरण के बाद उसे एक नई पहचान देने की कोशिशें शुरू हुई थीं। विल्सन का कार्यकाल मूल रूप से जुलाई 2027 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही पद छोड़ने का निर्णय लिया है। एयर इंडिया के साथ जुड़ने से पहले, विल्सन ने सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) जैसी वैश्विक कंपनी में लगभग 26 साल तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था। न्यूजीलैंड के रहने वाले विल्सन को विमानन उद्योग का गहरा अनुभव है।
अपने कार्यकाल के दौरान कैंपबेल विल्सन ने एयर इंडिया के पुनरुद्धार के लिए ‘Vihaan.AI’ नामक एक महत्वाकांक्षी 5 साल का रोडमैप तैयार किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एयरलाइन की सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाना, तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और वैश्विक नेटवर्क का विस्तार करना था। उनके नेतृत्व में एयर इंडिया ने विमानों के सबसे बड़े ऑर्डर देने और नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जोड़ने जैसे कई साहसिक कदम उठाए। विल्सन का मानना था कि एयर इंडिया को दुनिया की सबसे पसंदीदा एयरलाइंस में से एक बनाया जा सकता है, और इसके लिए उन्होंने कई जमीनी सुधार भी किए।
विल्सन के इस्तीफे के पीछे कंपनी के मौजूदा चुनौतीपूर्ण हालातों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में एयर इंडिया का घाटा कम होने के बजाय बढ़ गया है, जिससे टाटा समूह और बोर्ड के बीच चिंता बढ़ गई थी। कंपनी पर कर्ज का भारी बोझ और ऑपरेशन्स में आ रही लगातार तकनीकी खामियां भी उनके नेतृत्व के लिए चुनौती बनी रहीं। इसके अलावा, जून 2025 में अहमदाबाद में हुए भयावह विमान हादसे के बाद एयरलाइन पर विनियामक (Regulatory) दबाव काफी बढ़ गया है, जिसने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए थे।
कैंपबेल विल्सन के जाने की घोषणा के साथ ही टाटा समूह और एयर इंडिया का बोर्ड नए सीईओ की तलाश में जुट गया है। खबर है कि बोर्ड इस समय कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के प्रमुखों और अनुभवी दिग्गजों के साथ बातचीत कर रहा है। कंपनी एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो एयर इंडिया को वित्तीय संकट से बाहर निकाल सके और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाते हुए ग्राहकों का भरोसा फिर से जीत सके। आने वाले महीनों में विमानन जगत की नजरें इस बात पर टिकी रहेंगी कि एयर इंडिया की कमान अब किसके हाथों में सौंपी जाती है।
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