Air India engine failure : 12 जून को अहमदाबाद में हुए भयानक विमान हादसे ने देशभर को झकझोर दिया। एयर इंडिया की फ्लाइट दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कुल 260 लोगों की जान चली गई। इनमें से 241 लोग विमान में सवार थे, जबकि बाकी लोग हादसे के वक्त क्रैश साइट पर मौजूद थे। इस दुर्घटना के बाद से लोग यह जानने में दिलचस्पी ले रहे हैं कि भारत में बीते वर्षों में ऐसे कितने विमान हादसे या तकनीकी खराबियां हुई हैं।
RTI से हुआ खुलासा
अब इस मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा एक आरटीआई के माध्यम से यह खुलासा हुआ है कि पिछले पांच सालों में कुल 65 फ्लाइट्स के इंजन उड़ान के दौरान या टेकऑफ के समय बंद हो चुके हैं। यानी औसतन हर महीने भारत में एक विमान इंजन फेल्योर की घटना हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि इन सभी मामलों में पायलटों ने सूझबूझ से काम लेते हुए विमान को सुरक्षित लैंड करा लिया।
अहमदाबाद क्रैश रिपोर्ट का आंकड़ों में नहीं हुआ जिक्र
आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों में अहमदाबाद विमान हादसा शामिल नहीं है। DGCA द्वारा दी गई रिपोर्ट 31 मई 2025 तक की घटनाओं को कवर करती है, जबकि अहमदाबाद हादसा 12 जून 2025 को हुआ था। यह स्पष्ट करता है कि इस हादसे के आंकड़े अगली रिपोर्ट में जोड़े जाएंगे।
17 महीनों में 11 ‘मेडे कॉल’, सबसे ज्यादा इमरजेंसी लैंडिंग हैदराबाद में
DGCA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनवरी 2024 से मई 2025 तक के सिर्फ 17 महीनों में 11 फ्लाइट्स ने ‘मेडे कॉल’ दी थी। यानी इन विमानों में तकनीकी खराबी इतनी गंभीर थी कि तत्काल इमरजेंसी लैंडिंग की मांग की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक इमरजेंसी लैंडिंग हैदराबाद एयरपोर्ट पर दर्ज की गई है।
क्या होता है ‘मेडे कॉल’? जानिए इसका मतलब और उपयोग
‘मेडे’ कॉल एक फ्रेंच शब्द “m’aider” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है “मुझे सहायता करें” या “बचाओ”। जब विमान में किसी प्रकार की गंभीर तकनीकी खराबी या दुर्घटना की आशंका होती है, तब पायलट नजदीकी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) अथवा आस-पास उड़ रहे विमानों को चेतावनी देने के लिए ‘मेडे’ संदेश भेजता है। यह उच्च स्तरीय इमरजेंसी इंडिकेटर होता है, जो प्राथमिकता से रेस्क्यू और लैंडिंग सुविधा उपलब्ध कराता है।
अहमदाबाद हादसे की जांच रिपोर्ट
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अहमदाबाद हादसे की वजह का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ के तुरंत बाद ही विमान के दोनों फ्यूल स्विच बंद हो गए थे, जिससे इंजन तक ईंधन नहीं पहुंच सका और दोनों इंजन अचानक बंद हो गए। यह घटना इतना तेज हुई कि पायलट को आपातकालीन उपाय का समय भी नहीं मिल सका।
सेंसर की चेतावनी को नहीं लिया गया गंभीरता से
AAIB की 15 पेज की रिपोर्ट में एक और अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के ठीक बाद ‘STAB POS XDCR’ नामक एक चेतावनी संदेश विमान के सिस्टम में दर्ज हुआ था। यह संदेश विमान के बैलेंसिंग सेंसर से जुड़ा था। इसका अर्थ है कि यह सेंसर किसी भी वक्त फेल हो सकता था। यह सेंसर विमान के स्टेबलाइजर की पोजीशन को मापता है और इसके फेल होने पर विमान असंतुलित हो सकता है।
पायलट ने इस चेतावनी को रिकॉर्ड तो किया, लेकिन रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि शायद उस समय इसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसकी परिणति एक भयंकर हादसे के रूप में सामने आई।
तकनीकी खामी बन रही है चिंता का विषय
अहमदाबाद हादसे के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन कंपनियों और DGCA को टेक्निकल मेंटेनेंस पर और ज्यादा ध्यान देना चाहिए। लगातार हो रहे इंजन फेल्योर और इमरजेंसी लैंडिंग के मामले यह इशारा कर रहे हैं कि भारत में विमान सुरक्षा को लेकर गंभीर समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है।
जनता और यात्रियों में बढ़ी चिंता, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
ऐसे मामलों के बाद आम नागरिकों और विमान यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी DGCA और विमानन कंपनियों की कार्यप्रणाली पर आलोचनात्मक टिप्पणियां देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्लेन में आई चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाए, तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
एयर सेफ्टी पर पुनर्विचार की जरूरत
अहमदाबाद की दुर्घटना और पिछले 5 वर्षों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में वाणिज्यिक विमान संचालन में सुरक्षा के कई पहलू अभी भी कमजोर हैं। DGCA को चाहिए कि वह RTI में आए इन आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर टेक्निकल ऑडिट कराए और नियमित निरीक्षण प्रणाली को और कठोर बनाए। इसके साथ ही, पायलटों को अलर्ट सिग्नल को लेकर अधिक संवेदनशील और सतर्क बनाने की जरूरत है। भारत को सुरक्षित विमान यात्रा की दिशा में और सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में अहमदाबाद जैसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।