Ajit Doval Birthday
Ajit Doval Birthday: भारतीय रक्षा और कूटनीति की दुनिया में एक मशहूर जुमला है—‘जब अजीत डोभाल शांत हों, तो समझ लीजिए कि दुश्मन के खेमे में भारी शोर मचने वाला है।’ आज यानी मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को भारत के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की पहाड़ियों से निकलकर रायसीना हिल्स के गलियारों तक का उनका सफर साहस, बुद्धिमत्ता और देशभक्ति की एक ऐसी मिसाल है, जिसने भारत की सुरक्षा नीति को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया है।
1968 बैच के केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल को भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ यूं ही नहीं कहा जाता। उन्होंने अपने करियर के सात साल पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में बिताए। एक मुस्लिम बनकर वे पाकिस्तान की गलियों में जासूसी करते रहे। उन्होंने खुद एक दिलचस्प वाकया साझा किया था कि कैसे एक मजार के पास उनकी पहचान लगभग उजागर हो गई थी। एक बुजुर्ग ने उनके कान छिदे होने के कारण उन्हें पहचान लिया था, लेकिन डोभाल ने अपनी वाकपटुता से उस स्थिति को संभाल लिया। बाद में पता चला कि वह बुजुर्ग भी एक हिंदू था जो वहां अपनी पहचान छुपाकर रह रहा था।
अजीत डोभाल के करियर का सबसे जांबाज किस्सा 1988 के स्वर्ण मंदिर ऑपरेशन से जुड़ा है। जब खालिस्तानी आतंकियों ने मंदिर परिसर पर कब्जा कर रखा था, तब डोभाल एक रिक्शावाला बनकर अंदर दाखिल हुए। उन्होंने आतंकियों को विश्वास दिलाया कि वे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एजेंट हैं। इस चालाकी से उन्होंने आतंकियों की पूरी रणनीतिक जानकारी हासिल कर ली। इसी खुफिया सूचना के आधार पर भारतीय सेना ने बिना किसी बड़े नुकसान के मंदिर को मुक्त कराया। इस अदम्य साहस के लिए उन्हें ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा गया, और वे यह सम्मान पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी बने।
2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने डोभाल की रणनीतिक सूझबूझ पर भरोसा जताते हुए उन्हें NSA नियुक्त किया। यहीं से जन्म हुआ ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ का। इस सिद्धांत का सीधा अर्थ है—’भारत अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा, बल्कि खतरे के स्रोत पर जाकर उसे खत्म करेगा।’ इसकी झलक दुनिया ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक में देखी। डोभाल ने स्पष्ट कर दिया कि नया भारत अब उरी और पुलवामा जैसे हमलों का जवाब दुश्मन के घर में घुसकर देगा।
आज अजीत डोभाल की भूमिका केवल आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वे वैश्विक मंच पर भारत के सबसे बड़े ‘शैडो डिप्लोमैट’ हैं। रूस-यूक्रेन संकट हो या अमेरिका के साथ तकनीकी साझेदारी (iCET), डोभाल की मौजूदगी हर जगह निर्णायक होती है। कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद वहां जमीन पर उतरकर स्थानीय लोगों के साथ भोजन करना हो या पुतिन और जेक सुलिवन के साथ सीधी बातचीत, डोभाल ने साबित किया है कि वे आधुनिक युग के असली ‘चाणक्य’ हैं। उनका 81वां जन्मदिन भारत की उसी बढ़ती हुई शक्ति का प्रतीक है जिसका लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है।
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