Ajit Doval
Ajit Doval: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल हाल ही में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में देशभर से आए युवा प्रतिभागी देश के भविष्य और सुरक्षा रणनीतियों को समझने के लिए एकत्रित हुए थे। डोभाल ने अपने संबोधन में युवाओं को न केवल राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया, बल्कि अपनी व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़े कुछ ऐसे खुलासे किए जिसने वहां मौजूद हर किसी को हैरान कर दिया। तकनीक के इस दौर में डोभाल का सादा जीवन चर्चा का विषय बन गया है।
सत्र के दौरान जब सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ, तो एक युवा प्रतिभागी ने उनसे मोबाइल फोन और इंटरनेट के उपयोग को लेकर सवाल पूछा। इसके जवाब में डोभाल ने बेहद शालीनता से कहा, “मैं मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता हूँ।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि वे इंटरनेट से भी दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने बताया कि वे फोन का उपयोग केवल तब करते हैं जब परिवार से बात करनी हो या विदेशी समकक्षों से अत्यंत महत्वपूर्ण चर्चा अनिवार्य हो। एक ऐसे पद पर रहते हुए जहां सूचनाओं का आदान-प्रदान सेकंडों में होता है, डोभाल की यह दूरी उनकी सुरक्षा के प्रति सजगता को दर्शाती है।
जब उनसे पूछा गया कि वे इतने बड़े कार्यभार को बिना आधुनिक गैजेट्स के कैसे संभालते हैं, तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा कि काम मैनेज करने के और भी कई तरीके हैं। डोभाल के अनुसार, “कम्युनिकेशन के कई पारंपरिक और अतिरिक्त तरीके होते हैं, जिनके बारे में आम लोगों के पास जानकारी कम होती है।” उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में वे सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ऐसे माध्यमों का उपयोग करते हैं जिन्हें हैक करना या ट्रैक करना लगभग असंभव है। यह उनकी दूरदर्शिता और डेटा सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
अजीत डोभाल के करियर पर नजर डालें तो वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल 1968 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी हैं। वह भारत के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और इस पद पर लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डोभाल के नाम एक अनूठा रिकॉर्ड भी है; वह कीर्ति चक्र पाने वाले भारत के सबसे कम उम्र के पुलिस अधिकारी हैं। उनका पूरा जीवन इंटेलिजेंस, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों को समर्पित रहा है।
डोभाल की ख्याति उनकी ‘फील्ड ऑपरेशन्स’ की विशेषज्ञता के कारण है। वे कई वर्षों तक पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट के रूप में रहे, जहां उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाई। 1999 के कंधार विमान अपहरण (IC-814) के दौरान वे मुख्य वार्ताकारों में शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने मिजोरम, पंजाब और उत्तर-पूर्व में उग्रवाद को खत्म करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। डोकलाम विवाद हो या सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक की रणनीति, डोभाल की छाप हर जगह स्पष्ट दिखाई देती है।
डोभाल की लोकप्रियता का फायदा उठाकर अक्सर साइबर अपराधी उनके नाम का दुरुपयोग करते हैं। पिछले साल सरकारी फैक्ट चेक एजेंसी ने उनके नाम से चल रहे एक फर्जी फेसबुक अकाउंट को पकड़ा था, जो पाकिस्तान से साइबर हमले की चेतावनी दे रहा था। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने स्पष्ट किया है कि अजीत डोभाल का कोई आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। डोभाल ने युवाओं को भी डिजिटल दुनिया के खतरों से आगाह करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी।
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