Iran Violence
Iran Violence: ईरान पिछले 15 दिनों से भीषण हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक कुल 538 लोगों की जान जा चुकी है। हताहतों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मरने वालों में 490 आम प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक 10,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सड़कों पर उतरे लोग सरकार के खिलाफ कड़ा आक्रोश जता रहे हैं, जिसे दबाने के लिए बल का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है।
ईरान की संसद (मजलिस) के भीतर का माहौल भी तनावपूर्ण बना हुआ है। हाल ही में हुए एक लाइव सत्र के दौरान ईरानी सांसदों ने ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए। इस दौरान संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने अमेरिका को दो-टूक चेतावनी दी। कालीबाफ ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ने प्रदर्शनों के बहाने ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, युद्धपोत और इजराइल सीधे तौर पर ईरान के निशाने पर होंगे। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए दंगाइयों के साथ सबसे सख्त तरीके से निपटा जाएगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की स्थिति पर वाशिंगटन की पैनी नजर है। अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी है। ट्रंप ईरान में जारी मानवाधिकारों के उल्लंघन और प्रदर्शनकारियों पर की जा रही कड़ी कार्रवाई से नाराज हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के लोगों की आजादी की लड़ाई में मदद के लिए तैयार है। हालांकि, अभी तक किसी सैन्य हमले पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन सैन्य हस्तक्षेप के विकल्प को गंभीरता से टटोल रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सरकारी टेलीविजन पर दिए एक इंटरव्यू में स्थिति पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल ईरान में अराजकता फैलाने के लिए दंगों को भड़का रहे हैं। पजशकियान ने नागरिकों से अपील की कि वे ‘आतंकवादियों और दंगाइयों’ से दूर रहें। उन्होंने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन उन तत्वों को नहीं बख्शा जाएगा जो समाज को तबाह करने और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इजराइल को भी सतर्क कर दिया है। चूंकि ईरान ने सीधे तौर पर इजराइल को निशाना बनाने की बात कही है, इसलिए इजराइली सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। गौरतलब है कि इससे पहले जून में भी ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक संघर्ष चला था। ताजा हालात को देखते हुए इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर लंबी चर्चा हुई है। इस बातचीत में ईरान के घटनाक्रम और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे मध्य-पूर्व में एक बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
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