India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक समझौते ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने इस डील को देश की 70 प्रतिशत आबादी, जो सीधे तौर पर खेती-किसानी से जुड़ी है, के साथ एक सोची-समझी साजिश और बड़ा धोखा करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत के हितों को गिरवी रखा गया है।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए सपा प्रमुख ने भाजपा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि जो लोग आजादी से पहले विदेशियों के एजेंट के रूप में सक्रिय थे, वे आज सत्ता में बैठकर भी वही भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ के दावों को महज एक चुनावी ढोंग बताते हुए कहा कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था की संप्रभुता को गंभीर चोट पहुँचाती है। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि इस डील के पीछे बड़ा ‘कमीशन’ और भ्रष्टाचार का खेल हो सकता है।
अखिलेश यादव ने इस ट्रेड डील के दूरगामी आर्थिक परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि इसका असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। जब अमेरिकी कृषि उत्पाद शून्य या कम शुल्क पर भारतीय बाजारों में आएंगे, तो बिचौलियों और मुनाफाखोरों की एक नई फौज खड़ी हो जाएगी। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि आम मध्यम वर्ग के लिए रसोई का सामान और अनाज और भी महंगा हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विदेशी कंपनियों से ‘चंदा वसूली’ करेगी, जिसका बोझ अंततः जनता की जेब पर ही पड़ेगा। इससे किसान कर्ज के जाल में फँसकर अपनी जमीनें बड़े कॉर्पोरेट घरानों को बेचने पर मजबूर हो जाएगा।
सपा प्रमुख ने केवल वर्तमान ट्रेड डील ही नहीं, बल्कि सरकार के प्रस्तावित ‘सीड बिल’ (Seed Bill) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इसे किसानों के खिलाफ भाजपा की एक और “दिमागी उपज” करार दिया। अखिलेश यादव के अनुसार, विदेशी बीजों का भारतीय वातावरण में उपयोग खेती को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एक संगठित जाल बिछा रही है, जहाँ बीज से लेकर कीटनाशक और फसल बीमा से लेकर साइलो (भंडारण) तक, हर स्तर पर निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए कमीशनखोरी की जा रही है।
अंत में, अखिलेश यादव ने किसानों की ज्वलंत समस्याओं जैसे खाद की कमी, छुट्टा मवेशी और एमआरपी के मुद्दों को उठाते हुए जनता से इस “संगठित लूट” का विरोध करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा की नजर अब किसानों की उपजाऊ जमीन और उनकी पैदावार पर है। सरकार को घेरते हुए उन्होंने नया नारा दिया— “भाजपा हटाओ और खेत, किसानी, किसान बचाओ!” उनके इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में ट्रेड डील का मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक गूंजने वाला है।
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