Cyclone KIKO : प्रशांत महासागर में उठा चक्रवाती तूफान KIKO अब खतरनाक कैटेगरी-4 के हरिकेन में तब्दील हो चुका है और यह तेजी से हवाई द्वीप समूह की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी नेशनल हरिकेन सेंटर (NHC) के मुताबिक, KIKO की अधिकतम रफ्तार 145 मील प्रति घंटा (करीब 230 किमी/घंटा) तक पहुंच चुकी है और इसके साथ भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चेतावनी जारी की गई है।
हरिकेन KIKO इस समय हवाई द्वीप से लगभग 2510 किलोमीटर (1560 मील) दूर दक्षिण-पूर्व दिशा में है और यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में 9 मील प्रति घंटा (15 किमी/घंटा) की गति से आगे बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, KIKO सोमवार, 9 सितंबर 2025 को हवाई के उत्तरी हिस्सों से टकरा सकता है।
इसके बाद तूफान मंगलवार और बुधवार (10-11 सितंबर) के बीच हवाई के पूर्वी हिस्सों, जैसे बिग आइलैंड और माउई, तक पहुंच सकता है। इन इलाकों में 4 से 8 इंच तक बारिश, 60 मील प्रति घंटा (96 किमी/घंटा) की हवाएं चलने और बाढ़ व भूस्खलन जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
हवाई में इस संभावित तबाही को देखते हुए इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। कार्यवाहक गवर्नर सिल्विया ल्यूक ने कहा कि राज्य प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और राहत-बचाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नागरिकों और पर्यटकों से आग्रह किया गया है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि तूफान दक्षिण-पश्चिमी हवाओं (वर्टिकल विंड शीयर) की वजह से धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है। हवाई तक पहुंचते-पहुंचते KIKO उष्णकटिबंधीय तूफान में तब्दील हो सकता है, लेकिन तब तक भी इसकी ताकत काफी रहेगी और जान-माल को नुकसान पहुंचाने की आशंका बनी रहेगी।
नहीं, भारत पर इस तूफान का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। KIKO प्रशांत महासागर में उत्पन्न हुआ है, जबकि भारत के तटीय क्षेत्र हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से जुड़े हैं। NHC मियामी ने भी स्पष्ट किया है कि हरिकेन KIKO का रुख हिंद महासागर की ओर नहीं है और इसका भारत तक पहुंचना भौगोलिक रूप से असंभव है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में इस समय कोई चक्रवाती गतिविधि नहीं है और देश के किसी समुद्री तटीय इलाके को लेकर फिलहाल कोई तूफानी अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
हरिकेन KIKO से हवाई द्वीप में बड़ा खतरा पैदा हो गया है और आने वाले दिनों में इसका व्यापक असर हो सकता है। भारतवासियों को इस तूफान से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मौसम की असामान्य गतिविधियां अब हर क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
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