Ali Larijani Open Letter
Ali Larijani Open Letter: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने वैश्विक स्तर पर मुस्लिम उम्माह और इस्लामी सरकारों के नाम एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक पत्र जारी किया है। छह मुख्य बिंदुओं पर आधारित इस खुले पत्र में लारीजानी ने खाड़ी देशों की चुप्पी पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज जब ईरानी जनता एक भीषण अस्तित्वगत संकट से गुजर रही है, तब पड़ोसी इस्लामी देशों से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। लारीजानी ने पैगंबर के संदेशों का हवाला देते हुए एक गंभीर नैतिक सवाल उठाया कि यदि एक मुसलमान दूसरे सताए हुए मुसलमान की पुकार नहीं सुनता, तो उसे सच्चे इस्लाम की कसौटी पर कैसे कसा जा सकता है?
पत्र के दूसरे हिस्से में लारीजानी ने हालिया सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला है। उन्होंने दावा किया कि जब ईरान कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की मेज पर था, उसी समय अमेरिका और इजरायल के गठबंधन ने विश्वासघात करते हुए ‘धोखे भरा’ हमला किया। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य और रणनीतिक शक्ति को पंगु बनाना था। लारीजानी ने भारी मन से उल्लेख किया कि इस कायरतापूर्ण कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, कई जांबाज सैन्य कमांडर और सैकड़ों निर्दोष नागरिक शहीद हुए। हालांकि, उन्होंने गर्व से कहा कि ईरानी जनता के अटूट साहस और राष्ट्रीय प्रतिरोध ने दुश्मन की साजिशों को नाकाम कर दिया है।
लारीजानी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक और सैन्य स्तर पर ईरान लगभग अकेला लड़ रहा है। किसी भी प्रमुख इस्लामी सरकार ने खुलकर तेहरान का साथ नहीं दिया, फिर भी ईरानी प्रतिरोध की ताकतों ने ‘बड़े और छोटे शैतानों’ (अमेरिका और इजरायल) को एक ऐसे रणनीतिक दलदल में फंसा दिया है जहाँ से उनका निकलना मुश्किल है। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगा। लारीजानी ने उन देशों को भी चेतावनी दी जिनके सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले करने के लिए किया जा रहा है।
ईरानी नेता ने मुस्लिम राष्ट्रों को आगाह किया कि अमेरिका और इजरायल कभी किसी के वफादार नहीं हो सकते। उन्होंने अपील की कि इस्लामी जगत को अपने साझा भविष्य और सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। लारीजानी के अनुसार, ईरान किसी देश पर अपना प्रभुत्व नहीं जमाना चाहता, बल्कि वह क्षेत्रीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा का पक्षधर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पूरा ‘इस्लामी उम्माह’ एकजुट हो जाए, तो सभी मुस्लिम राष्ट्रों के लिए प्रगति, स्वतंत्रता और पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। एकता ही एकमात्र रास्ता है जो पश्चिमी विस्तारवाद को रोक सकता है।
अली लारीजानी वर्तमान में ईरान की सत्ता संरचना और सुरक्षा तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। अयातुल्ला खामेनेई की शहादत के बाद, देश की सुरक्षा नीतियों का नेतृत्व उन्हीं के हाथों में है। यही कारण है कि वे अब सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल के निशाने पर हैं। उनकी बढ़ती ताकत और प्रभाव को देखते हुए अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने लारीजानी के बारे में जानकारी देने वाले के लिए 10 लाख डॉलर के भारी-भरकम इनाम की घोषणा की है। यह पत्र न केवल एक अपील है, बल्कि एक ऐसे नेता की ललकार है जो वैश्विक दबाव के बावजूद झुकने को तैयार नहीं है।
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