Albania News: अल्बानिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुशनर से जुड़ी विकास परियोजना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। आंदोलन के दूसरे दिन छात्रों के शामिल होने से प्रदर्शन का दायरा बढ़ गया। राजधानी तिराना में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को तैनात किया। प्रस्तावित तटीय विकास परियोजना को लेकर पहले से ही विरोध जारी था, लेकिन अब यह मुद्दा सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
‘फ्लेमिंगो क्रांति’ के नाम से पहचाना जा रहा आंदोलन
इस विरोध की शुरुआत सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के साथ हुई थी। बाद में छात्र सरकार-विरोधी आंदोलन में शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने इस आंदोलन को ‘फ्लेमिंगो क्रांति’ नाम दिया है। इसकी वजह गुलाबी रंग के फ्लेमिंगो पक्षी की तस्वीरों वाले पोस्टर हैं, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा है। आंदोलन में प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है। प्रदर्शनकारी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और सरकार की प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
वाटर कैनन और आंसू गैस से भीड़ को हटाने की कोशिश
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई घंटों तक वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी शहर के अलग-अलग हिस्सों में जुटते रहे। घटनास्थल से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और दुकानों को निशाना बनाया, खिड़कियां तोड़ीं और कुछ इमारतों में आग लगा दी। पुलिस ने बार-बार उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास किया। रात होने के बाद भी तनाव बना रहा और सरकारी इमारतों के आसपास गतिविधियां जारी रहीं।
न्याय मंत्रालय की इमारत में आग लगने की घटना
प्रदर्शन के दौरान न्याय मंत्रालय की इमारत को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने इमारत की खिड़कियां तोड़ने के बाद एक मंजिल पर आग लगा दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। इसके बाद दमकलकर्मियों ने आग बुझाई। दिनभर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क से उखाड़ी गई ईंटें और पेट्रोल बम फेंके। कूड़ेदानों में आग लगाने तथा बैरिकेड्स और बाड़ लगाकर रास्ते अवरुद्ध करने की घटनाएं भी सामने आईं। इन घटनाओं से शहर में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
वित्त मंत्रालय और सरकारी कार्यालय भी बने निशाना
वित्त मंत्रालय की इमारत के बाहर भी प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। रिपोर्ट के अनुसार, वहां लगी बाड़ का इस्तेमाल खिड़कियां तोड़ने के लिए किया गया और दरवाजे तोड़ने की कोशिश की गई। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी थोड़े समय के लिए इमारत के भीतर भी दाखिल हो गए। पुलिस ने उन्हें रोकने और परिसर से बाहर करने की कोशिश की। सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाए जाने से प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी
पुलिस द्वारा पीछे धकेले जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का एक समूह प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर बढ़ गया। वहां पहुंचकर कुछ लोगों ने इमारत पर पत्थर फेंके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवेश द्वार के पास एक पेड़ में कुछ समय के लिए आग लग गई, जिसे दमकलकर्मियों ने बुझा दिया। कुशनर से जुड़ी परियोजना के विरोध से शुरू हुई यह हलचल अब शिक्षा, भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकार के नेतृत्व के खिलाफ उठ रही मांगों से भी जुड़ गई है। आगे आंदोलन का रुख और सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।