US-Iran War : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सैन्य संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है। दोनों देशों की ओर से हमले और जवाबी कार्रवाई के दावे किए गए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हैंगर स्थित हैं। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि ईरान की ओर से दागी गईं 18 से 20 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया है।
ईरान ने हमले को ‘या हैदर अल-करार’ नाम दिया
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने कथित सैन्य अभियान को ‘या हैदर अल-करार’ नाम दिया है। IRGC के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान के पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट किए जाने के जवाब में की गई। ईरानी पक्ष का दावा है कि हमले में ठोस और तरल ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया और अमेरिकी लड़ाकू विमानों के रखरखाव वाले हैंगर, फॉरवर्ड हैंगर तथा शेल्टर को निशाना बनाया गया।
F-35, F-16 और F-15 विमानों के हैंगर निशाने पर
IRGC ने दावा किया कि उसके हमलों में अमेरिका के F-35, F-16 और F-15 लड़ाकू विमानों से जुड़े सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, इन हमलों से अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों से हुए नुकसान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि का विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में ईरानी दावों और वास्तविक नुकसान के बीच स्थिति स्पष्ट होने में समय लग सकता है।
जॉर्डन ने 18 मिसाइलें रोकने का किया दावा
जॉर्डन की सेना ने ईरान के हमले को लेकर अलग जानकारी दी है। जॉर्डन के मुताबिक, उसकी तरफ कुल 20 मिसाइलें दागी गईं। इनमें से 18 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया गया, जबकि दो मिसाइलें खुले इलाकों में जाकर गिरीं। जॉर्डन की इस कार्रवाई का उद्देश्य अपने क्षेत्र और वहां मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को संभावित नुकसान से बचाना बताया गया है।
अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले का भी दावा
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुछ वीडियो फुटेज भी जारी किए हैं। IRGC का दावा है कि इन फुटेज में ओमान की खाड़ी और अरब सागर में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए जाते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उनसे जुड़े नुकसान की विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं है।
अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकर नष्ट किए
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कथित तौर पर ईरान के पांच कच्चे तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की। यह कार्रवाई उस घटनाक्रम के बाद बताई गई है, जिसमें IRGC ने पिछले दो दिनों के दौरान एक अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, युद्धपोत ने दोनों हमलों को नाकाम कर दिया और क्षेत्रीय जलक्षेत्र में अपनी गश्त जारी रखी। इन घटनाओं में किसी अमेरिकी सैनिक या कर्मी के घायल होने की सूचना नहीं दी गई।
किन ईरानी टैंकरों को बनाया गया निशाना?
CENTCOM की कार्रवाई में ओमान की खाड़ी में चार क्रूड ऑयल कैरियर—एम/टी कविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन 1 और एम/टी रिएस्को—को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा खर्ग द्वीप के पास एम/टी दरिया के खिलाफ भी कार्रवाई का दावा किया गया है। अमेरिकी बलों के अनुसार, जहाजों पर कार्रवाई से पहले उनके क्रू सदस्यों को सुरक्षित तरीके से जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था।
संघर्ष बढ़ने से मध्य पूर्व में चिंता बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है, वहीं अमेरिका ईरानी सैन्य और तेल परिवहन से जुड़े ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है। यदि दोनों देशों के बीच हमले और पलटवार का सिलसिला जारी रहता है, तो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार पर भी इसका असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।
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