Israel-Hezbollah War
Israel-Hezbollah War: इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने आधिकारिक पुष्टि की कि उनके सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान की सीमा पार कर एक बड़े जमीनी ऑपरेशन का आगाज कर दिया है। इजरायल का कहना है कि यह एक ‘लक्ष्य-केंद्रित’ अभियान है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में मौजूद हिजबुल्लाह के सैन्य ठिकानों को नेस्तनाबूद करना है। इस अचानक सैन्य कार्रवाई ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम को लेकर बेहद चिंतित है, क्योंकि जमीनी हमले से क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट गहराने की पूरी आशंका है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अनिवार्य था। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इजरायली टैंक और सैनिक संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित ‘ब्लू लाइन’ की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहाड़ियों पर कब्जा जमा रहे हैं। सीमा पर हिजबुल्लाह के लड़ाकों और इजरायली कमांडो के बीच आमने-सामने की भीषण जंग छिड़ी हुई है। हिजबुल्लाह भी रॉकेटों और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों से इजरायल को कड़ा जवाब दे रहा है, जिससे सीमावर्ती बस्तियां खंडहर में तब्दील हो रही हैं।
इजरायली सेना ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है कि उन्होंने ईरान की राजधानी तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर खड़े एक महत्वपूर्ण सरकारी विमान, एयरबस A340, को हवाई हमले में पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इजरायल के अनुसार, यह विमान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और सर्वोच्च नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और कूटनीतिक समन्वय के लिए उपयोग किया जाता था। इस हमले के जरिए इजरायल ने ईरान के भीतर तक मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इजरायल का मानना है कि इस विमान के नष्ट होने से ईरान और उसके सहयोगी गुटों के बीच सैन्य संचार और आपसी तालमेल में भारी बाधा उत्पन्न होगी।
मौजूदा संघर्ष की जड़ें 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए औपचारिक हवाई हमलों में छिपी हैं। 2 मार्च से हिजबुल्लाह ने अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की झड़ी लगा दी थी। साल 2024 के अंत में हुए अल्पकालिक युद्धविराम के बाद यह अब तक की सबसे हिंसक सैन्य मुठभेड़ है। इस संघर्ष ने न केवल शांति वार्ताओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, बल्कि ईरान और इजरायल के बीच एक सीधी और ‘खुली जंग’ की स्थिति पैदा कर दी है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
लेबनान में इजरायल की मौजूदगी और ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचों पर हमलों ने बड़े पैमाने पर विस्थापन शुरू कर दिया है। लाखों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का चेतावनी भरा लहजा है कि यदि यह जमीनी युद्ध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। ईरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका ने वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा दिए हैं। अब यह युद्ध केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल चुका है।
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