UN Trump controversy : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हुई तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे “ट्रिपल सैबोटाज” (Triple Sabotage) बताते हुए कहा कि यह सब कुछ उनके खिलाफ सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है और UN महासचिव को पत्र भेजने की बात कही है।

एस्केलेटर की घटना से शुरुआत
बुधवार को UNGA सत्र के दौरान ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी एक एस्केलेटर से मुख्य हॉल की ओर बढ़ रहे थे, तभी एस्केलेटर अचानक रुक गया। ट्रंप ने कहा, “अगर हमने हैंडरेल नहीं पकड़ा होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह पूरी तरह से साजिश थी।” ट्रंप और मेलोनी को इसके बाद पैदल ही चढ़ाई करनी पड़ी।

टेलीप्रॉम्प्टर हुआ बंद
एस्केलेटर की घटना के बाद, ट्रंप जब मंच पर पहुंचे तो टेलीप्रॉम्प्टर ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे एक सेकंड में समझ आ गया कि यह दूसरी साजिश है। लाखों दर्शक और वैश्विक नेता मेरी स्पीच देख रहे थे और टेलीप्रॉम्प्टर बंद हो गया।” ट्रंप ने 57 मिनट लंबा भाषण बिना किसी स्क्रिप्ट के दिया, जिसे उन्होंने “बेहद सराहनीय” बताया।
हॉल में नहीं आई आवाज
तीसरी घटना भाषण के दौरान हुई जब महासभा हॉल में मौजूद नेताओं को उनकी आवाज सुनाई ही नहीं दी। ट्रंप के अनुसार, कई नेताओं ने ईयरपीस लगाने के बाद ही उन्हें सुन पाया। “मैंने मेलोनी से पूछा कि स्पीच कैसी लगी, तो उन्होंने कहा— मैंने कुछ सुना ही नहीं,” ट्रंप ने दावा किया।
ट्रंप की मांग और UN का जवाब
ट्रंप ने इस “त्रिपल साजिश” की जांच के लिए UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस को पत्र भेजने की बात कही है और कहा कि एस्केलेटर के कैमरा फुटेज और इमरजेंसी बटन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि UN कर्मचारी मजाक में एस्केलेटर रोकने की बात कर रहे थे, जो “चिंताजनक” है।
UN महासचिव के प्रवक्ता स्तेफान दुजारिक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह तकनीकी कारणों से हुआ। एक वीडियोग्राफर की गतिविधियों के कारण एस्केलेटर का सेफ्टी मैकेनिज्म सक्रिय हो गया था, जिससे यह रुक गया। बाद में तकनीशियन ने इसे रीसेट किया।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि यदि यह जानबूझकर किया गया sabotage है, तो संबंधित लोगों को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और जांच होनी चाहिए। ट्रंप की ओर से लगाए गए ये आरोप जहां एक तरफ सुर्खियों में हैं, वहीं UN ने तकनीकी कारणों को सामने रखकर इन घटनाओं को महज “संयोग” बताया है। अब देखना होगा कि क्या यह मामला किसी गंभीर जांच तक पहुंचेगा या इसे एक और “राजनीतिक बयानबाजी” माना जाएगा।
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