Ambani Vantara News : देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक अंबानी परिवार द्वारा संचालित गुजरात के ‘वंतर’ वन्यजीव संरक्षण केंद्र पर अब गंभीर आरोप लग चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस संबंध में विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी है, जो केंद्र पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन की जांच करेगी।

क्या हैं आरोप?
अदालत में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि:देश-विदेश से बिना उचित अनुमति के जानवर और पक्षी लाए गए।राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के नियमों की अनदेखी की गई।कुछ दुर्लभ प्रजातियों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भी उल्लंघन किया गया।जानवरों की देखभाल में लापरवाही बरती गई।पानी के अत्यधिक उपयोग से स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर पड़ा। याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्टों और पर्यावरण विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया कि ‘वंतर’ केवल एक निजी प्रदर्शन केंद्र बनकर रह गया है, जहां जानवरों को संरक्षण नहीं, बल्कि दिखावे के लिए रखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी बराल की पीठ ने इस मामले को “गंभीर सार्वजनिक हित” से जुड़ा बताया। कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है, जिसमें: न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर (सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज) – प्रमुख, न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान (सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड HC), एक आईपीएस अधिकारी, एक आईआरएस अधिकारी, जांच दल को 12 सितंबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी है।
‘वंतरा’ की सफाई
‘वंतरा’ के अधिकारियों ने आधिकारिक बयान में कहा :“हम पारदर्शिता और कानून के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। ‘वंतर’ का उद्देश्य केवल और केवल वन्यजीवों का संरक्षण, पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच दल के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे।”उन्होंने मीडिया और जनता से “अफवाहें न फैलाने” की अपील भी की।
क्या है ‘वंतरा’?
‘वंतरा’ का संचालन अनंत अंबानी कर रहे हैं।यह जामनगर, गुजरात में स्थित है और हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किया गया था।यहां 2,000 से अधिक प्रजातियों के जानवर और कुल 1.5 लाख से ज्यादा जीव रहते हैं।दावा किया जाता है कि यह एशिया का सबसे बड़ा निजी वन्यजीव संरक्षण केंद्र है।
इस मामले ने निजी वन्यजीव संरक्षण केंद्रों की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो अंबानी परिवार के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, यह केस भारत में वन्यजीव संरक्षण के नियमों को और सख्ती से लागू करने की दिशा में एक नजीर बन सकता है।










