Ambikapur News
Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में रंगों के पावन पर्व होली के ठीक अगले दिन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अभिभावकों और छात्रों में असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता शिवेश सिंह (बाबु) ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिला कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि प्रस्तावित परीक्षा की तिथियों को आगे बढ़ाया जाए। उनका तर्क है कि होली जैसे बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के तत्काल बाद परीक्षा आयोजित करना विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा और उन पर अनावश्यक मानसिक बोझ डालेगा।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में शिवेश सिंह ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि इस वर्ष 4 मार्च को पूरे देश के साथ अंबिकापुर में भी होली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। होली का पर्व केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक मिलन और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि 5 और 6 मार्च को परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, तो छात्र त्योहार की खुशियों में शामिल नहीं हो पाएंगे। एक ओर जहाँ बच्चों को उत्सव में भाग लेने की लालसा होगी, वहीं दूसरी ओर परीक्षा का डर उन्हें मानसिक रूप से अशांत कर देगा।
शिवेश सिंह ने अपने पत्र में यह तर्क भी दिया कि भारत में होली के दूसरे दिन यानी ‘धुरैडी’ और उसके अगले दिन तक भी त्योहार का खुमार और सामाजिक मिलन का दौर जारी रहता है। कई परिवारों में इस दौरान पारंपरिक पकवान बनते हैं और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में 5 मार्च की सुबह परीक्षा केंद्र पर पहुंचना विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य छात्रों की योग्यता का निष्पक्ष आकलन करना है, न कि किसी विशेष परिस्थिति में उन्हें तनावपूर्ण वातावरण में धकेलना।
ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित किया गया है। पत्र के अनुसार, केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन, नगर निगम, स्वच्छता विभाग और जल प्रदाय शाखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी होली के उत्सव में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं। ये वे लोग हैं जो शहर की व्यवस्था संभालने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन भी करते हैं। ऐसे अधिकारियों के बच्चों के लिए भी त्योहार के बीच परीक्षा की तैयारी करना और उसमें उपस्थित होना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
शिवेश सिंह ने जिला प्रशासन और विशेषकर कलेक्टर से यह भावनात्मक अपील की है कि वे ‘मासूम विद्यार्थियों’ के हित में निर्णय लें। उन्होंने मांग की है कि परीक्षाओं को कम से कम तीन से चार दिन आगे बढ़ाया जाए, ताकि बच्चे होली का आनंद लेने के बाद तरोताजा होकर और मानसिक संतुलन के साथ परीक्षा हॉल में बैठ सकें। शिवेश का कहना है कि प्रशासन का एक सकारात्मक कदम न केवल छात्रों को राहत देगा, बल्कि समाज में यह संदेश भी जाएगा कि सरकार लोक-परंपराओं और नागरिकों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील है।
इस मांग के सार्वजनिक होने के बाद शहर के विभिन्न स्कूलों के अभिभावकों के बीच भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया से लेकर मोहल्लों तक लोग इस ज्ञापन का समर्थन कर रहे हैं। अब शहर की नजरें अंबिकापुर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रशासन विद्यार्थियों और उनके परिवारों की इस व्यावहारिक समस्या को समझते हुए परीक्षा कार्यक्रम में कोई संशोधन करेगा? यह आने वाले एक-दो दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
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