Ambikapur Post Office Scam : अंबिकापुर जिले के प्रधान डाकघर में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। करीब 15 खाताधारकों की परिपक्व हो चुकी एफडी की 35 लाख रुपये से अधिक राशि में कथित हेराफेरी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एफडी की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद रकम संबंधित जमाकर्ताओं के बचत खातों में जमा करने के बजाय दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई और बाद में उसे निकाल लिया गया।
तीन कर्मचारियों पर हुई विभागीय कार्रवाई
मामले की जांच के बाद डाक विभाग ने प्रधान डाकपाल समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच जारी है और अधिकारियों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद डाक विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
खाताधारक की शिकायत से खुला पूरा मामला
इस कथित वित्तीय हेराफेरी का खुलासा बलरामपुर जिले के निवासी सिराजुल हक की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने प्रधान डाकघर में फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थी। एफडी की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नियम के अनुसार इसकी परिपक्वता राशि उनके बचत खाते में पहुंचनी चाहिए थी, लेकिन रकम जमा नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने डाकघर में शिकायत दर्ज कराई।
जांच में 35 लाख से ज्यादा की राशि का पता
शिकायत मिलने के बाद डाकघर के सहायक अधीक्षक अजय सिंह चौहान ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान मार्च 2026 से अब तक करीब 15 खातों में अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार इन खातों से संबंधित 35 लाख रुपये से अधिक की राशि में कथित हेराफेरी हुई है। जांच अब यह पता लगाने के लिए भी आगे बढ़ाई जा रही है कि कहीं ऐसे और खाते तो प्रभावित नहीं हुए हैं।
सीपीसी शाखा में सामने आई कथित अनियमितता
जांच में कथित गड़बड़ी का केंद्र प्रधान डाकघर का सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर यानी CPC शाखा सामने आया है। एफडी की परिपक्वता पूरी होने के बाद रकम खाताधारक के बचत खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में कई कर्मचारियों की भूमिका होती है। इसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, सुपरवाइजर और डाकपाल स्तर के कर्मचारियों की जिम्मेदारी शामिल होती है।
दूसरे खातों में रकम भेजकर निकासी का आरोप
प्रारंभिक जांच के मुताबिक एफडी की मैच्योरिटी राशि को संबंधित खाताधारकों के बचत खातों में जमा करने के बजाय कथित तौर पर दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इन खातों से रकम निकाल ली गई। सहायक अधीक्षक अजय सिंह चौहान ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संभावित मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
विभाग कर रहा अन्य खातों की भी जांच
डाक विभाग अब उन अन्य खाताधारकों के रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है, जिनकी एफडी हाल के समय में परिपक्व हुई है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सभी खाताधारकों को उनकी मैच्योरिटी राशि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मिली या नहीं। किसी तरह की अतिरिक्त अनियमितता सामने आने पर उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
तीन कर्मचारियों की भूमिका जांच में सामने आई
विभागीय जांच के अनुसार CPC में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर रामजीलाल मीणा, बीमा संबंधी कार्य देखने वाली सुपरवाइजर श्वेता श्रीवास्तव और राशि जारी करने वाले डाकपाल मनोज पांडेय की भूमिका कथित तौर पर सामने आई है। जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद विभाग ने तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
खाताधारकों को राशि लौटाने की तैयारी
डाक विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित जमाकर्ताओं की रकम वापस दिलाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यह पता लगाया जा रहा है कि हेराफेरी केवल सामने आए 15 खातों तक सीमित है या इसमें और खाताधारक भी प्रभावित हुए हैं।
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