Hanuman Janmotsav Ambikapur
Hanuman Janmotsav Ambikapur : गांधीनगर स्थित श्री मारुतिनंदन मंदिर में इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव का पर्व अत्यंत गौरवशाली और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। श्री हनुमत सेवा समिति, गांधीनगर के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम विशेष रूप से अष्टधातु से निर्मित श्री हनुमत लला की प्रतिमा के सोलहवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस दोहरे अवसर ने नगरवासियों के उत्साह को दोगुना कर दिया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
उत्सव की शुरुआत 29 मार्च को हुई, जो 2 अप्रैल तक निरंतर भक्ति भाव के साथ जारी रही। इस पांच दिवसीय अनुष्ठान के दौरान ‘श्री मारुतिनंदन ज्ञान यज्ञ’ का आयोजन किया गया। यज्ञ की गरिमा को बनाए रखने के लिए विशेष रूप से धर्मनगरी चित्रकूट से यज्ञचार्यों की टोली बुलाई गई थी। विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में प्रतिदिन यज्ञ-वेदी का विधि-विधान से पूजन किया गया और विश्व शांति व जनकल्याण की भावना के साथ हवन कुंड में आहुतियां डाली गईं। आहुतियों की सुगंध से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
इस धार्मिक समागम का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध कथावाचक परमपूज्य श्री दीपू भाई महाराज जी के मुखारबिंद से प्रवाहित ‘श्री रामकथा’ की अमृत धारा रही। व्यासपीठ से महाराज जी ने रामचरितमानस के मर्मस्पर्शी प्रसंगों का संगीतमय वाचन किया। उन्होंने भगवान राम के आदर्शों और हनुमान जी की अडिग भक्ति के संबंधों को इतनी सुंदरता से प्रस्तुत किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। भजनों की धुन पर भक्तगण झूमने को मजबूर हो गए, जिससे मंदिर प्रांगण में एक अद्भुत उत्सव का माहौल निर्मित हो गया।
आयोजन के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्तियों ने हिस्सा लिया। कलश यात्रा के बाद विधिवत रूप से यज्ञ वेदी पूजन और स्थापना की प्रक्रिया संपन्न हुई। पांच दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस प्रकार के आयोजनों से समाज में एकता और धार्मिक चेतना का संचार होता है।
मुख्य जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी का विशेष पूजन, अभिषेक और नयनाभिराम श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक ‘सोहर’ गीतों ने वातावरण में मिठास घोल दी। भगवान के जन्म की खुशी में मंगल गीत गाए गए और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके पश्चात मंदिर शिखर पर महाधवज स्थापित किया गया, जो विजय और भक्ति का प्रतीक है। आरती के समय भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गूंज उठा।
यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद एक विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया, जो ढलती शाम से शुरू होकर देर रात तक चलता रहा। इस महाप्रसाद वितरण कार्यक्रम में लगभग 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने महाभोग और चरणामृत ग्रहण किया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में वार्ड पार्षद एवं नगरपालिक निगम सदस्य विपिन पांडेय जी का विशेष और सराहनीय समर्पण रहा। साथ ही, श्री हनुमत सेवा समिति के कर्मठ सदस्यों, नगर के गणमान्य नागरिकों और युवा साथियों ने दिन-रात अपनी सेवाएं देकर व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। समिति ने अंत में सभी दानदाताओं और भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए सभी को हनुमान जन्मोत्सव की मंगलकामनाएं दीं।
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