MNREGA Kabirdham No 1
MNREGA Kabirdham No 1 : छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में कबीरधाम जिले ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, कबीरधाम जिला सर्वाधिक परिवारों को काम देने, मानव-दिवस सृजन और दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराने के मानकों पर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है। जिला प्रशासन की सक्रियता और योजनाओं के जमीनी स्तर पर सटीक क्रियान्वयन का परिणाम है कि आज कबीरधाम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय नियमित निगरानी और मांग आधारित कार्यों की समय पर स्वीकृति को दिया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन का मुख्य केंद्र बिंदु वनांचल और मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ना रहा है। जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि जैसे ही ग्राम पंचायतों से काम की मांग आए, तुरंत तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर काम शुरू कराया जाए। इस वर्ष जिले में 11 हजार 466 परिवारों को पूरे 100 दिन का रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है, जो प्रशासन की एक बड़ी कामयाबी है।
योजना का उद्देश्य केवल मजदूरी देना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी संपत्तियों का निर्माण करना भी है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, प्राथमिकता उन कार्यों को दी गई जो आजीविका और पर्यावरण से जुड़े हैं। इसमें आजीविका डबरी, नए तालाबों का निर्माण, पुराने जलाशयों का गहरीकरण और कच्ची नालियों के निर्माण जैसे जल संरक्षण कार्यों को प्रमुखता मिली। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन शेड और पशुपालन शेड जैसे आजीविका संवर्धन कार्यों को भी तेजी से पूरा किया गया है।
कबीरधाम जिले का प्रदर्शन आंकड़ों के लिहाज से भी काफी प्रभावशाली है। जिले ने कुल 58 लाख 54 हजार 40 मानव-दिवस का सृजन किया, जो छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक है। रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या 1 लाख 42 हजार 482 रही, जो जिले को प्रदेश में पहले पायदान पर खड़ा करती है। सबसे सराहनीय पक्ष यह रहा कि समाज के संवेदनशील वर्ग यानी दिव्यांगजनों को रोजगार देने में भी जिला प्रथम रहा, जहाँ 2,538 दिव्यांगजनों को 58,493 मानव-दिवस का काम मिला।
महिला भागीदारी के मामले में भी कबीरधाम जिला पीछे नहीं है। जिले की 1 लाख 30 हजार 160 पंजीकृत महिलाओं ने 29 लाख 33 हजार 959 मानव-दिवस का रोजगार प्राप्त किया, जिससे जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। आर्थिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजदूरों के खातों में सीधे 124 करोड़ 53 लाख 46 हजार रुपये की मजदूरी हस्तांतरित की गई। समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की इस व्यवस्था ने ग्रामीणों का योजना के प्रति भरोसा और अधिक बढ़ाया है।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि मनरेगा के माध्यम से हो रहा यह निवेश ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने में सहायक सिद्ध हुआ है। गांवों में तालाबों और नालियों जैसे बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल कृषि को लाभ हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों के हाथ में नकदी आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौट आई है। कबीरधाम जिले का यह ‘वर्किंग मॉडल’ अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणा बन गया है।
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