Ambikapur mine conflict:
Surguja mine conflict: सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड में स्थित अमेरा कोयला खदान विस्तार को लेकर बीते छह माह से सुलग रहा असंतोष बुधवार को हिंसक टकराव में बदल गया। अपनी पैतृक ज़मीन को बचाने की ज़िद पर अड़े ग्रामीणों का सामना उस प्रशासनिक दल और भारी पुलिस बल से हुआ जो लंबे समय से अटके खदान विस्तार कार्य को शुरू कराने के लिए पहुँचा था। ज़मीन, न्याय और भविष्य की यह लड़ाई आज पूरे दिन अमेरा की पहाड़ियों पर संघर्ष का शोर मचाती रही।
सुबह करीब 10:30 बजे, खदान क्षेत्र में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। SECL प्रबंधन के अधिकारी, अपर कलेक्टर सुनील नायक, एसडीएम, तहसीलदार और भारी संख्या में पुलिस बल यहाँ ग्रामीणों से बातचीत करने पहुँचे थे। ज़मीनी विवाद और मुआवजे पर लंबी बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन जल्द ही यह प्रयास विफल हो गया। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे और देखते ही देखते तनाव इतना बढ़ा कि दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
पहले दौर की झड़प के बाद, जब लगा कि तनाव कुछ कम हो रहा है, तभी दोपहर करीब 2 बजे एक स्कूली छात्रा की गिरफ्तारी ने माहौल में जबरदस्त आग लगा दी। इस कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों की भारी भीड़ छात्रा को छुड़ाने के लिए पुलिस बल की ओर उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने पुलिस पर डंडों और पत्थरों से जोरदार हमला कर दिया। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख, पुलिस को भी बल प्रयोग करना पड़ा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को अंततः आँसू गैस के गोले दागने पड़े।
प्रशासनिक दल ने संघर्ष के बीच भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। बीते लगभग छह महीने से अधिग्रहण की ज़मीन पर डटे प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की अस्थायी झोपड़ियों को पुलिस ने बलपूर्वक हटा दिया और आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस ने उनकी बात सुने बिना और बिना किसी वैध प्रक्रिया का पालन किए जबरन यह कार्रवाई की है। वहीं, पुलिस और प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था को और बिगड़ने से रोकने के लिए यह कठोर कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
आज के इस हिंसक संघर्ष में दोनों ओर से काफी लोग घायल हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, घटना में 40 से अधिक पुलिसकर्मी चोटिल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। इसके अलावा, आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण भी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विवाद की मुख्य वजह भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का लंबित मुद्दा है। SECL ने वर्ष 2016 में कोल बैरिंग एक्ट 1957 के तहत ग्राम परसोड़ी कला की 11.192 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। कुल 238 प्रभावित ग्रामीणों में से अभी तक केवल 15–16 लोगों को ही मुआवज़ा मिला है। शेष ग्रामीण पिछले कई वर्षों से उचित मुआवज़े और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह स्पष्ट रुख है कि “मुआवजा और पुनर्वास के बिना वे एक इंच भी ज़मीन नहीं देंगे।”
इस खदान से छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल और राजस्थान विद्युत निगम को कोयला आपूर्ति होती है, जिसके कारण प्रशासन इस परियोजना को ‘राज्य के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट’ बता रहा है। इसके विपरीत, घायल ग्रामीणों का कहना है कि “सरकार और कंपनी हमारी ज़मीन छीन रही है। छह महीने से हम शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आज बिना कारण हम पर लाठीचार्ज किया गया। हम अपनी ज़मीन नहीं छोड़ेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।”
अपर कलेक्टर सुनील नायक ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि “बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई। प्रशासन शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
फिलहाल अमेरा में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। वर्षों से लंबित मुआवज़े की पीड़ा और सरकार के लिए ज़रूरी कोयला खदान—इनके बीच फंसा यह इलाका एक बड़े सवाल के सामने खड़ा है क्या खदान विस्तार का रास्ता बनेगा या यह टकराव और लंबा चलेगा?
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