Ambikapur News : डिजिटल दौर में जहां शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए मोबाइल एप और ऑनलाइन सिस्टम को जरूरी बनाया जा रहा है, वहीं सरगुजा जिले के मैनपाट में जमीनी हकीकत सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। यहां प्राथमिक शाला करमहा में पदस्थ शिक्षक को स्कूल तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ रही है। बारिश के बीच शिक्षक पानी से होकर कंधे पर किताबों और जरूरी सामान का बोझ लेकर नदी पार करते नजर आए। यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और बुनियादी सुविधाओं के बीच के अंतर को साफ तौर पर सामने ला रही है।

मैनपाट क्षेत्र के प्राथमिक शाला करमहा में पदस्थ शिक्षक का नदी पार करते हुए वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं। तस्वीरों में शिक्षक घुटनों से ऊपर तक पानी में उतरकर स्कूल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। एक शिक्षक अपने कंधे पर किताबों से भरा सामान लेकर पानी पार कर रहे हैं, जबकि उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी नदी पार करता नजर आ रहा है।

बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में शिक्षकों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा। ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुल और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।
इस तस्वीर ने अब VSK जैसे एप के जरिए ऑनलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों से तकनीकी माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की अपेक्षा की जा रही है, लेकिन कई दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और आवागमन जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को पहले दूरस्थ स्कूलों तक पहुंचने के लिए सड़क, पुल और नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बाद ऑनलाइन उपस्थिति जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
मैनपाट की यह तस्वीर सिर्फ एक शिक्षक की मजबूरी नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों की कहानी बयां कर रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और करमहा स्कूल तक सुरक्षित पहुंच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।












