Ambikapur Law Seat Row: अंबिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में लॉ की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कॉलेज में स्वीकृत लॉ सीटों की संख्या को 240 से घटाकर 120 कर दिया है। सीटों में हुई इस कटौती के बाद प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों और कॉलेज प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

पूर्व डिप्टी सीएम ने मुख्यमंत्री से की सीटें बढ़ाने की मांग
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि अंबिकापुर पीजी कॉलेज में लॉ की सीटों को दोबारा बढ़ाकर 240 किया जाए। सिंहदेव ने कहा कि यह कॉलेज सरगुजा संभाग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है और सीटों में कमी का सीधा असर ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

दूर-दराज के छात्रों के लिए बढ़ेगी परेशानी
टीएस सिंहदेव ने अपने पत्र में बताया कि सरगुजा संभाग में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कानून की पढ़ाई करने के लिए अंबिकापुर पीजी कॉलेज पर निर्भर हैं। क्षेत्रीय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीटों की कमी के कारण कई छात्रों को निजी लॉ कॉलेजों का रुख करना पड़ सकता है, जो आर्थिक और भौगोलिक दोनों दृष्टि से कठिन होगा।
प्रोफेसरों की कमी बनी सीट घटने की वजह
अंबिकापुर पीजी कॉलेज में लॉ सीटों की संख्या कम किए जाने का मुख्य कारण प्रोफेसरों की कमी बताया जा रहा है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सिन्हा ने जानकारी दी कि पहले लॉ विभाग में 320 सीटें स्वीकृत थीं, जिन्हें घटाकर 240 किया गया था। अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश के बाद सीटों की संख्या और कम होकर 120 रह गई है।
लॉ विभाग में शिक्षकों की संख्या के आधार पर तय हुई सीटें
डॉ. अनिल सिन्हा के अनुसार बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने शिक्षकों की संख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण करने का नियम बनाया है। वर्तमान में कॉलेज के लॉ सेक्शन में आठ नियमित प्रोफेसर कार्यरत हैं। इस आधार पर दो सेक्शन को मंजूरी मिली है, जिनमें प्रत्येक सेक्शन में 60-60 छात्रों को प्रवेश दिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यदि कॉलेज में चार और प्रोफेसरों की नियुक्ति होती है तो सीटों की संख्या में 60 सीटों तक की वृद्धि संभव है। शिक्षकों की संख्या बढ़ने के बाद ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार सीटों को बढ़ाया जा सकेगा।
लॉ प्रवेश के लिए मिले हैं 1000 से ज्यादा आवेदन
इस वर्ष लॉ पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कॉलेज को 1000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। सीटों की संख्या घटने से बड़ी संख्या में छात्रों को प्रवेश से वंचित होना पड़ सकता है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार अब छात्रों का चयन मेरिट और अंकों के आधार पर किया जाएगा।
2023 में मिली थी बार काउंसिल से मान्यता
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय से संबद्ध अंबिकापुर पीजी कॉलेज को वर्ष 2023 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से लॉ पाठ्यक्रम की मान्यता मिली थी। इससे पहले कॉलेज बिना मान्यता के करीब दस वर्षों तक लॉ की डिग्री प्रदान करता रहा था।कॉलेज में वर्ष 1972 से एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। पहले यह कॉलेज गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से संबद्ध था और बाद में वर्ष 2014 में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद इसे संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया।
छात्र हित में सीट बढ़ाने की उठी मांग
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सरकार और संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि छात्र हित को ध्यान में रखते हुए लॉ सीटों की संख्या फिर से 240 की जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विधि शिक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए सीटों में कटौती उचित नहीं है।उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर जल्द निर्णय लेकर छात्रों को राहत देगी और सरगुजा संभाग के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा।
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