Ambikapur Encroachment
Ambikapur Encroachment : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में जल संरक्षण और सार्वजनिक संपत्तियों को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप स्थित रिंग बांध तालाब पर अवैध कब्जे की कोशिशों के खिलाफ जब नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची, तो उन्हें भारी विरोध और अभद्रता का सामना करना पड़ा। लगभग 57 डिसमिल की इस बेशकीमती जमीन पर कुछ रसूखदारों द्वारा मिट्टी डालकर कब्जा किया जा रहा था। जब प्रशासन ने इस अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की, तो कब्जाधारियों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि निगम कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की धमकी भी दी।
नगर निगम कमिश्नर के आदेश पर शनिवार को मोहम्मद इमरान के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम भारी मशीनरी के साथ रिंग बांध तालाब पहुंची थी। अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर 3 एक्सीवेटर, 2 डंपर और 5 ट्रैक्टर तैनात किए गए थे। जैसे ही टीम ने तालाब में पाटी गई मिट्टी को हटाना शुरू किया, 2-3 युवक वहां पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। इन युवकों ने ड्राइवर और कर्मचारियों को अपशब्द कहे और डंडे से मारने की धमकी देकर काम रुकवा दिया। कब्जाधारियों का दावा था कि इस भूमि पर न्यायालय का ‘स्टे’ लगा हुआ है, जबकि प्रशासन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
हंगामे और धमकी के बाद निगमकर्मी और ड्राइवर एक बार के लिए सहम गए और काम रोक दिया। इसकी सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों को दी गई। मामला गंभीर होते देख मौके पर राजस्व विभाग, पुलिस बल और निगम के बड़े अधिकारी पहुंचे। प्रशासन के कड़े तेवर देख कब्जाधारी पीछे हट गए। निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जमीन पर कोई स्टे नहीं है और बिना अनुमति के तालाब को पाटना अपराध है। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा मिट्टी हटाने का काम शुरू किया गया और तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाने की प्रक्रिया तेज की गई।
यह मामला शहर के गिरते जलस्तर और पर्यावरण के लिए एक चेतावनी है। लंबे समय से शहर के कई तालाबों को मिट्टी से पाटकर उन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय रहते जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए। रिंग बांध तालाब के खसरा नंबर 37/14 की जमीन को हड़पने की साजिश इसका ताजा उदाहरण है। इससे पहले भी भाथूपारा तालाब पर एक होटल संचालक द्वारा किए गए कब्जे पर प्रशासन का बुलडोजर चला था, जिससे यह साफ होता है कि शहर में जल निकायों को नष्ट करने का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है।
तालाबों पर कब्जे की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर ने एक विशेष बैठक बुलाई। प्रशासन ने अब यह निर्णय लिया है कि शहर के सभी तालाबों का सीमांकन कर उनका सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। रिंग बांध तालाब सहित अन्य जलाशयों के चारों ओर फेंसिंग या पक्का निर्माण किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी उन पर मिट्टी डालकर कब्जा न कर सके। प्रशासन का लक्ष्य है कि अंबिकापुर की ऐतिहासिक धरोहर और जल स्रोतों को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए। वर्तमान में पुलिस उन युवकों की पहचान कर रही है जिन्होंने सरकारी काम में बाधा डाली और निगमकर्मियों को धमकाया।
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