छत्तीसगढ़

Ambikapur roads : अंबिकापुर की सड़कों पर सियासी गड्ढे! टेंडर प्रक्रिया में उलझा डामरीकरण, आपसी खींचतान में फंसी ‘शहर सरकार’

Ambikapur roads : “बारिश आई, सड़क गई… अब बची सिर्फ राजनीति!” — अंबिकापुर की बदहाल सड़कों को लेकर जनता की यही आवाज़ अब सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक गूंज रही है। जहां एक तरफ नगर निगम क्षेत्र की सड़कों पर जान हथेली पर रखकर चलने की नौबत है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया खुद गड्ढों में फंसी हुई नजर आ रही है। सवाल ये नहीं है कि सड़क क्यों नहीं बनी, सवाल ये है कि छह करोड़ की राशि और तीन बार टेंडर प्रक्रिया के बावजूद आखिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो सका?

क्या कारण है कि शहर सरकार और संगठन के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा? क्या नगर निगम में बैठे जिम्मेदार अफसर दबाव में हैं? क्या वर्चस्व की लड़ाई में शहर की सड़कें बर्बाद हो रही हैं?

दरअसल, नगरीय निकाय चुनाव के समय जिस डामरीकरण और सड़क सुधार को लेकर भाजपा ने आम जनता से वादा किया था, वही अब शहर सरकार के गले की हड्डी बन गया है। बारिश से पहले शहर की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार ने अंबिकापुर नगर निगम को लगभग 6 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। योजना थी कि पांच ज़ोन में बांटकर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों का डामरीकरण कराया जाएगा।

लेकिन हकीकत ये है कि 22 अप्रैल से शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया 23 जुलाई तक तीन बार निरस्त की जा चुकी है। इन 90 दिनों में जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि सिर्फ ‘फाइलों का खेल’ खेलते रहे। टेंडर क्यों रद्द हुए? वजह कोई नहीं बता रहा। अब जनता सवाल कर रही है, लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है।

विपक्ष ने साधा निशाना, शहर सरकार को दी चेतावनी

नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर भाजपा की नगर सरकार पर जमकर हमला बोला। उनका आरोप है कि निगम में बैठे कुछ प्रभावशाली लोग अपने खास ठेकेदारों को टेंडर दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, इसी कारण बार-बार निविदाएं रद्द की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम आयुक्त भी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।

शफी अहमद ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जानलेवा सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, नालियों की सफाई और आवारा मवेशियों को हटाने जैसी बुनियादी समस्याओं पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस नगर निगम का घेराव, चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

सत्ता बनाम संगठन: टकराव की आहट?

नगर निगम के गलियारों में एक और चर्चा गहराती जा रही है — शहर सरकार और भाजपा संगठन में तालमेल की भारी कमी है। स्थानीय कद्दावर नेता और निगम से जुड़े पदाधिकारी आमने-सामने हैं। दोनों ही पक्ष अपने ‘चहेते’ ठेकेदार को टेंडर दिलवाने के लिए खींचतान में लगे हैं। नतीजा, टेंडर प्रक्रिया ही बार-बार रद्द हो रही है और सड़क निर्माण ठप पड़ा है।

बहरहाल, नगर निगम की ये सियासी लड़ाई अब जनता की परेशानी में बदल चुकी है। एक सामान्य सी बारिश भी शहर को पानी-पानी कर देती है। गड्ढों से भरी सड़कें हादसों को न्यौता दे रही हैं और नगर निगम चुपचाप देख रहा है।

सवाल जनता का है — क्या वाकई ठेकेदारों की लड़ाई में शहर का विकास गिरवी रख दिया गया है? और अगर हां, तो जिम्मेदार कौन?

Read More  : Trump on Obama : डोनाल्ड ट्रंप का सनसनीखेज दावा: ओबामा देशद्रोही हैं, सबूत मेरे पास हैं

thetarget365

Share
Published by
thetarget365

Recent Posts

Balrampur Opium: करोड़ों की अफीम और कमजोर खुफिया तंत्र.. बलरामपुर में कौन चला रहा है नशे का नेटवर्क?

Opium Cultivation : सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले में लगभग 7 करोड़ का अफीम पुलिस…

7 hours ago

Messi vs Yamal 2026: मेसी बनाम यमल का महामुकाबला रद्द, मिडिल ईस्ट युद्ध की भेंट चढ़ा फुटबॉल फाइनल

Messi vs Yamal 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भीषण तनाव और युद्ध की परिस्थितियों ने…

11 hours ago

By-Election 2026: बारामती और राहुरी सहित 8 सीटों पर चुनावी रण का आगाज, 23 अप्रैल को वोटिंग; सुनेत्रा पवार होंगी उम्मीदवार

By-Election 2026: भारत निर्वाचन आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मुख्य…

11 hours ago

Harish Rana euthanasia: “सबको माफ करते हुए जाओ…” इच्छामृत्यु से पहले हरीश राणा का वीडियो वायरल

Harish Rana euthanasia: भारत के कानूनी और मानवीय इतिहास में एक अत्यंत भावुक क्षण दर्ज…

11 hours ago

सोशल मीडिया आईडी हैक कर आपत्तिजनक फोटो-वीडियो अपलोड करने वाला आरोपी यूपी से गिरफ्तार

Ambikapur News : महिला उत्पीड़न और साइबर ब्लैकमेलिंग के एक गंभीर मामले में सरगुजा पुलिस…

12 hours ago

This website uses cookies.