Ambikapur deer death: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में स्थित संजय वन वाटिका से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां आवारा कुत्तों के झुंड ने बाड़े में घुसकर 15 मासूम हिरणों को अपना शिकार बना लिया। इस बड़ी लापरवाही और वन्यजीवों की दर्दनाक मौत के बाद प्रदेश का वन महकमा पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लेते हुए पूरे राज्य के वन्यजीव क्षेत्रों के लिए कड़े और नए सुरक्षा नियम लागू कर दिए हैं। अब टाइगर रिजर्व से लेकर छोटे अभ्यारण्यों तक, आवारा कुत्तों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।
बीती 20-21 मार्च की दरमियानी रात संजय वन वाटिका में सुरक्षा की बड़ी चूक देखने को मिली। कुत्तों के एक हिंसक झुंड ने बाड़े की घेराबंदी को पार कर भीतर मौजूद 15 शाकाहारी वन्यजीवों (हिरणों) पर हमला कर उन्हें मार डाला। सुबह जब वन विभाग के कर्मचारियों ने यह मंजर देखा, तो विभाग में हड़कंप मच गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रबंधन की पोल खोल दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वन्यजीवों के लिए बनाए गए सुरक्षित घेरे अब सुरक्षित नहीं रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है जो सुरक्षा में हुई चूक के कारणों का पता लगा रही है।
वन विभाग ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ‘बारनवापारा मॉडल’ को पूरे प्रदेश में अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में रहने वाले सभी पालतू कुत्तों के गले में एक विशेष रंग का पट्टा (कलर कॉलर) लगाया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पालतू और लावारिस कुत्तों के बीच फर्क करना है। यदि कोई कॉलर वाला पालतू कुत्ता प्रतिबंधित वन क्षेत्र या अभ्यारण्य के भीतर पाया जाता है, तो उसके मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना वसूला जाएगा।
राज्य के सभी टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्कों में अब निगरानी व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वन अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि कोर और बफर जोन में किसी भी बाहरी जानवर, विशेषकर कुत्तों की आवाजाही को शून्य किया जाए। बाघों और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के आवास क्षेत्र में आवारा कुत्तों का प्रवेश न केवल उनके लिए खतरा है, बल्कि यह रेबीज जैसी घातक बीमारियों के फैलने का कारण भी बन सकता है।
अगले दो हफ्तों के भीतर सभी क्षेत्रीय वन अधिकारियों और मैदानी अमले को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण सत्र में उन्हें कुत्तों को पकड़ने के सुरक्षित तरीके, NTCA की SOP और पशु क्रूरता निवारण नियमों की जानकारी दी जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण पाने के लिए ‘एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया’ (AWBI) के नियमों का पूर्ण पालन किया जाएगा। कुत्तों को पकड़ने और उन्हें स्थानांतरित करने के दौरान किसी भी प्रकार की अमानवीयता या क्रूरता नहीं बरती जाएगी। इसके लिए “स्ट्रीट डॉग मैनेजमेंट और रैबीज नियंत्रण” मॉड्यूल को क्रियान्वित किया जा रहा है।
वन विभाग का मानना है कि बिना जनभागीदारी के वन्यजीवों की सुरक्षा संभव नहीं है। इसीलिए वन क्षेत्रों से सटे गांवों में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया जाएगा कि वे अपने पालतू जानवरों को जंगल की ओर न जाने दें। पोस्टर, बैनर और मुनादी के जरिए लोगों को नए नियमों से अवगत कराया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडेय ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग अब हर जिले के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर रहा है ताकि भविष्य में अंबिकापुर जैसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Bengal Violence: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी के पावन अवसर पर उत्सव का…
Iran Strait Of Hormuz News: पश्चिम एशिया की रणभूमि से एक ऐसी खबर आई है…
Global Trade Shock: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच शुक्रवार, 27 मार्च 2026…
Caribbean Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति…
Middle East War: पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में अमेरिका को जिस आसान जीत की उम्मीद…
Zojila Avalanche: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर शुक्रवार…
This website uses cookies.