Swarang Kids Academy
Swarang Kids Academy : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां स्थानीय ‘सरगुजिहा’ बोली बोलने के कारण एक मासूम बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई। अंबिकापुर के चोपड़ापारा स्थित ‘स्वरंग किड्स एकेडमी’ ने एक 4 वर्षीय बच्चे का एडमिशन सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उसने शिक्षकों के सवालों के जवाब अपनी मातृभाषा में दिए थे। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने सख्त कदम उठाते हुए स्कूल प्रबंधन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह एकेडमी बिना किसी वैध मान्यता के ही संचालित की जा रही थी।
घटना की शुरुआत तब हुई जब राजकुमार यादव अपने बेटे सत्यम का नर्सरी में दाखिला कराने स्कूल पहुंचे। जब स्कूल ने एडमिशन देने से मना कर दिया, तो पीड़ित पिता ने हार मानने के बजाय सीधे कलेक्टर अजीत वसंत से इसकी लिखित शिकायत की। कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच टीम गठित की। जांच के दौरान स्कूल की दलीलें खोखली पाई गईं। प्रशासन ने साफ कर दिया कि किसी भी बच्चे को उसकी क्षेत्रीय भाषा या बोली के आधार पर शिक्षा से दूर रखना न केवल अनैतिक है, बल्कि नियमों का उल्लंघन भी है।
पीड़ित राजकुमार यादव ने बताया कि उनके घर में सभी सरगुजिहा बोली ही बोलते हैं, इसलिए उनका बेटा सत्यम अभी हिंदी में निपुण नहीं है। उन्हें उम्मीद थी कि स्कूल के माहौल में रहकर वह हिंदी सीख जाएगा। हालांकि, डेमो क्लास के बाद स्कूल प्रबंधन ने जो तर्क दिया, वह बेहद अपमानजनक था। परिजनों के अनुसार, स्कूल ने कहा कि “यहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं और वे आपके बच्चे की भाषा (सरगुजिहा) सीख जाएंगे, इसलिए हम एडमिशन नहीं दे सकते।” इस भेदभावपूर्ण व्यवहार ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने स्कूल की इस हरकत की कड़ी निंदा की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोई स्कूल सरगुजिहा बोलने के कारण बच्चे का भविष्य खराब कर रहा है, तो ऐसे स्कूल को तत्काल बंद कर देना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग से सख्त से सख्त जांच की मांग की। वहीं, छात्र संगठन NSUI ने भी मोर्चा खोलते हुए स्कूल का पंजीयन स्थायी रूप से रद्द करने और संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है।
जांच के दौरान जब शिक्षा विभाग ने स्कूल के दस्तावेज खंगाले, तो पता चला कि स्वरंग किड्स एकेडमी बिना किसी आधिकारिक मान्यता के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा रही थी। एक तरफ जहां स्वरंग एकेडमी ने मासूम को दुत्कार दिया, वहीं मानवता की मिसाल पेश करते हुए ‘बचपन प्ले स्कूल’ ने आगे बढ़कर बच्चे को अपने यहां नि:शुल्क एडमिशन दिया है। अब सत्यम उसी सम्मान के साथ अपनी पढ़ाई शुरू कर सकेगा, जिसका वह हकदार है।
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