Delhi Police terror bust
Delhi Police terror bust : राजधानी दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक गुप्त सूचना के आधार पर देश के विभिन्न राज्यों में सघन छापेमारी की और चार संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए ये आरोपी महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से ताल्लुक रखते हैं, जो एक सुनियोजित तरीके से भारत के भीतर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने देश के प्रमुख शहरों पर मंडरा रहे एक बड़े खतरे को टाल दिया है।
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से बुरी तरह प्रभावित थे। पुलिस के मुताबिक, इनका मुख्य उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना और ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे खतरनाक विचारों को अमली जामा पहनाना था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 19 वर्षीय मो. हमाद, 22 वर्षीय शेख इमरान, 23 वर्षीय मो. सोहिल और 32 वर्षीय मोसैब अहमद के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी न केवल खुद कट्टरपंथी बन चुके थे, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य युवाओं को भी हिंसा के रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ये आरोपी सोशल मीडिया पर ‘क्लोज्ड ग्रुप्स’ (गुप्त समूह) के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। इन ग्रुप्स में जिहाद, हथियारों के उपयोग और आतंकी विचारधारा पर लगातार चर्चा होती थी। पुलिस ने बताया कि इनमें से दो आरोपी रिमोट कंट्रोल से चलने वाले आईईडी (IED) यानी बम बनाने की एडवांस स्टेज पर थे। उन्होंने बम बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल जैसे बॉल बेयरिंग, लोहे की कीलें और खिलौना कारों के सर्किट जुटा लिए थे, ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में रिमोट से विस्फोट किया जा सके।
पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने कबूल किया कि वह दिसंबर 2025 में दिल्ली आया था और उसने लाल किला तथा इंडिया गेट जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारकों की विस्तृत रेकी की थी। उसने न केवल इन जगहों की संवेदनशील जानकारी जुटाई, बल्कि लाल किले की तस्वीरों के साथ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट भी साझा की थीं। इसका मकसद विशेष समुदाय के युवाओं को आकर्षित करना और उन्हें देश के प्रतीकों के खिलाफ खड़ा करना था।
यह मॉड्यूल केवल विचारधारा तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तार युवकों में से एक सक्रिय रूप से ‘क्राउड फंडिंग’ के जरिए पैसे जुटा रहा था। वहीं दूसरा आरोपी सोशल मीडिया पर नए रंगरूटों को हथियार चलाने और सैन्य प्रशिक्षण दिलाने का झांसा दे रहा था। इन गतिविधियों के लिए वे टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग कर रहे थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें।
हैरानी की बात यह है कि ये चारों आरोपी बहुत ही साधारण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। इनमें से अधिकांश ने केवल 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। पेशेवर रूप से कोई मैकेनिक है, कोई सिक्योरिटी गार्ड, तो कोई प्लंबर के रूप में काम कर रहा था। लेकिन ऑनलाइन उपलब्ध कट्टरपंथी भाषणों और नफरती वीडियो ने इनके दिमाग में इस कदर जहर भर दिया कि ये देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करने लगे।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इनके पास से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन और बम बनाने का सामान बरामद किया गया है। वर्तमान में पुलिस इन आरोपियों के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और किसी बड़े आतंकी संगठन से उनके जुड़ाव की बारीकी से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
SRH vs CSK : IPL 2026 का 27वां मैच क्रिकेट इतिहास के सबसे सांस रोक…
Giant hunting spider : प्रकृति के रहस्यों की खोज में जुटे दक्षिण अमेरिकी शोधकर्ताओं ने…
SDM Car Accident : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने…
Dinesh Mahant Thakordas : कहते हैं कि उम्र केवल एक संख्या होती है, और इस…
UP Home Guard Recruitment : उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं…
Gucchi Mushroom : आधुनिक दौर में खेती अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह…
This website uses cookies.