UN Trump Ultimatum: संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका को सख़्त चेतावनी दी है। दरअसल, बीते दो महीनों में अमेरिकी सेना ने कैरिबियन और प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में कथित नशा तस्करी करने वाली कई नौकाओं पर घातक हमले किए हैं। इन सैन्य अभियानों में अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क (Volker Türk) ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए अमेरिका से तुरंत इन्हें रोकने की मांग की है।
वोल्कर टुर्क ने कहा कि नशीली दवाओं की तस्करी रोकना ज़रूरी है, लेकिन घातक हमले इसका समाधान नहीं हैं। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत घातक बल का इस्तेमाल केवल तब किया जा सकता है, जब किसी की जिंदगी को तत्काल खतरा हो।उन्होंने कहा, “अमेरिका ने अपने हमलों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इन नौकाओं पर मौजूद लोग किसी की जान के लिए तत्काल खतरा थे।”टुर्क ने वॉशिंगटन से मांग की कि वह कानूनी प्रक्रिया अपनाए यानी जहाज़ों को रोकना, संदिग्धों को हिरासत में लेना और न्यायिक कार्रवाई करना, न कि सीधे सैन्य हमले।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान नशीली दवाओं की अवैध तस्करी रोकने के लिए बेहद आवश्यक है।ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्रवाई का “कानूनी अधिकार” है। अमेरिका ने हाल के हफ्तों में समुद्री क्षेत्रों में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, जिसमें नौसेना के जहाज़, लड़ाकू विमान और दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत “यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड” शामिल हैं।
इन हमलों ने लैटिन अमेरिकी देशों में नाराज़गी बढ़ा दी है। मैक्सिको, कोलंबिया और वेनेज़ुएला ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।अमेरिका ने जवाबी रुख अपनाते हुए कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो पर ड्रग तस्करी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया और प्रतिबंध भी लगाए हैं।वहीं, ट्रंप ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर ड्रग माफिया से मिलीभगत का आरोप लगाया, जिसे मादुरो ने सिरे से खारिज कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र का यह बयान अमेरिका के लिए एक तरह का अल्टीमेटम माना जा रहा है। यदि वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकी, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद और वैश्विक न्यायिक निकायों में जवाब देना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले “extrajudicial killings (बिना न्यायिक प्रक्रिया की हत्याएं)” की श्रेणी में आ सकते हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक छवि पर भी असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वह खुद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा समर्थक होने का दावा करता है।
संयुक्त राष्ट्र की यह चेतावनी स्पष्ट संदेश है — “कानून के दायरे में रहो अमेरिका।”नशा तस्करी के खिलाफ लड़ाई ज़रूरी है, लेकिन जब यह लड़ाई कानूनी सीमाओं से बाहर चली जाती है, तो सवाल उठते हैं। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अपनी नीति में बदलाव करते हैं या नहीं।
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