Amit Jogi Conversion Bill
Amit Jogi Conversion Bill: छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इस विधेयक के विरोध में मोर्चा खोलते हुए लोकभवन के सामने इसकी प्रतियां जला दीं। जोगी ने इस कदम को नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया और राज्यपाल से अपील की कि वे इस विवादित विधेयक पर हस्ताक्षर न करें और इसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस लौटा दें।
अमित जोगी ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पेश करने के लिए सत्र के अंतिम दिन का चुनाव किया, जो उनकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में इस पर सार्थक चर्चा चाहती थी, तो इसे सत्र की शुरुआत में लाना चाहिए था। जोगी के अनुसार, अंतिम समय में विधेयक लाना विधायकों को इसे पढ़ने और समझने के अवसर से वंचित करने जैसा है, जो सरकार के भीतर व्याप्त डर और जल्दबाजी को दर्शाता है।
जोगी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक लोगों की आस्था पर नियंत्रण स्थापित करने की एक सोची-समझी कोशिश है। उनके मुताबिक, इस कानून के जरिए सरकार ने “धर्म के दरवाजे पर कलेक्टर को बैठा दिया है।” अब नागरिकों को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और किसी अन्य धर्म में आस्था जताने के लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी होगी, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है।
विधेयक में ‘प्रलोभन’ शब्द की व्याख्या को लेकर अमित जोगी ने गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस परिभाषा को इतना विस्तृत कर दिया है कि अब शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा जैसी बुनियादी गतिविधियों को भी धर्मांतरण के प्रलोभन की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है। इससे न केवल धार्मिक प्रचार-प्रसार प्रभावित होगा, बल्कि सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं के लिए भी कानूनी अड़चनें पैदा होंगी। जोगी ने चेतावनी दी कि विवाह को शून्य घोषित करने जैसे प्रावधानों से सामाजिक ताना-बाना बिखर सकता है।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि बस्तर, जशपुर और रायगढ़ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण ने सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ दिया है। नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में यह विवाद गुटीय संघर्ष का रूप ले चुका है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई है। वर्तमान में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण सरकार ने इस पारदर्शी और सख्त मसौदे को तैयार किया है, ताकि प्रलोभन या दबाव में होने वाले परिवर्तनों को रोका जा सके।
अमित जोगी ने स्पष्ट किया कि इस कानून का विरोध केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि न्यायालय और चुनावी मैदान में भी किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले पांच राज्यों के चुनावों में जनता भाजपा की इन नीतियों का करारा जवाब देगी। जोगी के अनुसार, “हड़बड़ी में कानून नहीं, बल्कि विवाद पैदा होते हैं” और छत्तीसगढ़ की शांतिप्रिय जनता अपनी धार्मिक स्वायत्तता पर किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगी। इस विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ गया है।
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