Amit Shah Speech
Amit Shah Speech: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। शाह ने इस घटना को भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए एक काला दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि करीब 40 साल बाद ऐसा मौका आया है जब सदन के अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताया गया है, जो बेहद अफसोस-जनक है। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि स्पीकर किसी एक राजनीतिक दल का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह पूरे सदन का संरक्षक (कस्टोडियन) होता है। इस पद की गरिमा पर सवाल उठाना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट करने जैसा है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा स्पीकर पर ‘बोलने न देने’ के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने उनके संसदीय रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। शाह ने बिना नाम लिए तंज कसा कि जब सदन में महत्वपूर्ण चर्चाएं होती हैं और बोलने का मौका आता है, तब नेता प्रतिपक्ष जर्मनी और इंग्लैंड की सैर कर रहे होते हैं। गृह मंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राहुल गांधी बजट सत्र से भी गायब रहे और पिछली दो लोकसभाओं (16वीं और 17वीं) में उनकी उपस्थिति मात्र 51-52 प्रतिशत रही है। शाह के अनुसार, जिन्हें संसदीय नियमों की बुनियादी समझ नहीं है और जो सदन में समय नहीं देते, वे पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं।
सदन की कार्यवाही के संचालन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की नींव पिछले 75 वर्षों में बहुत गहरी हुई है, लेकिन विपक्ष आज उस साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा कोई ‘मेला’ नहीं है जहाँ कोई भी आकर कुछ भी बोल दे। सदन नियमों और प्रक्रियाओं की नियमावली से चलता है। शाह ने कहा कि जो बातें संसदीय नियमों के दायरे में नहीं आतीं, उन्हें बोलने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती, चाहे वह सत्ता पक्ष का सदस्य हो या विपक्ष का। नियमों का पालन करना हर सांसद की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
अमित शाह ने भाजपा के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने दशकों तक विपक्ष की भूमिका निभाई है, लेकिन कभी भी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार नहीं किया। उन्होंने कहा, “तीन बार पहले भी अविश्वास प्रस्ताव आए हैं, मगर एनडीए और भाजपा ने हमेशा अध्यक्ष पद की गरिमा का संरक्षण किया है।” शाह ने विपक्ष को नसीहत दी कि संवैधानिक अधिकारों की मांग करना सही है, लेकिन पद की गरिमा को ठेस पहुँचाना स्वस्थ राजनीति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा अध्यक्ष से संरक्षण मांगा है, उन पर हमला नहीं किया।
अपने भाषण के अंत में अमित शाह ने राहुल गांधी के सलाहकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी के सलाहकार ‘एक्टिविस्ट’ या ‘आंदोलनकारी’ हो सकते हैं, लेकिन सदन के भीतर उन्हें सक्रियतावाद के बजाय नियमों के अनुसार ही आचरण करना होगा। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग ‘विशेषाधिकार’ के मुगालते में जी रहे हैं और खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं। शाह ने कहा कि यही कारण है कि जनता और खुद उनकी पार्टी भी अब ऐसे नेताओं को संरक्षण नहीं दे रही है, जिससे उनका राजनीतिक आधार लगातार छोटा होता जा रहा है।
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