Amit Shah Narcotics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब स्पष्ट लक्ष्य, तय समय-सीमा और जवाबदेही के साथ नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाएगी। शाह ने कहा कि 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने नारकोटिक्स को देश के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए अभियान को मिशन मोड में चलाने पर जोर दिया।
नशा-मुक्त भारत के लिए केंद्र और राज्यों में समन्वय
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी ANTF के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि नशा-मुक्त भारत का लक्ष्य केवल केंद्र सरकार के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए राज्यों की सरकारों और केंद्र के विभिन्न विभागों को एक साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और साझा रणनीति से ही नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का किया जिक्र
अमित शाह ने पिछले कुछ वर्षों में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद, नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों से निपटने में केंद्र ने राज्यों के सहयोग से महत्वपूर्ण प्रगति की है। उनके अनुसार, देश लंबे समय से जिन समस्याओं का सामना कर रहा था, उनमें कई के खिलाफ सरकार ने प्रभावी कार्रवाई की है। अब इसी तरह नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान को भी व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई को बताया सबसे कठिन
गृह मंत्री ने नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को सबसे कठिन चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई को बीच में छोड़ा नहीं जा सकता। शाह के मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और देश के युवाओं को विकास की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए नशे की समस्या से निपटना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को नशीले पदार्थों के प्रभाव से बचाने के लिए केंद्र और राज्यों को लगातार प्रयास करने होंगे।
जब्ती से आगे नेटवर्क ध्वस्त करने पर जोर
अमित शाह ने नारकोटिक्स विरोधी अभियान में कार्रवाई का तरीका बदलने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब केवल बैठकों और रिपोर्टिंग तक सीमित रहने के बजाय ठोस परिणामों पर ध्यान देना होगा। उनके मुताबिक, सिर्फ ड्रग्स की जब्ती पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना जरूरी है। साथ ही मामलों को दर्ज करने के बाद दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करना होगा।
पहली दो ANTF बैठकों से बना रोडमैप
गृह मंत्री ने ANTF सम्मेलनों की पिछली बैठकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहली कॉन्फ्रेंस में नारकोटिक्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई थी। दूसरी बैठक में इस व्यवस्था को प्रभावी कार्रवाई में बदलने के लिए क्षमता निर्माण, कार्रवाई और उसके क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। अब तीसरी कॉन्फ्रेंस में इसी रोडमैप को लक्ष्य आधारित और समयबद्ध अभियान में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
31 दिसंबर 2029 तक लक्ष्य पूरा करने का दावा
अमित शाह ने कहा कि तीसरी ANTF कॉन्फ्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लक्ष्य, समय-सीमा और जवाबदेही तय करके आगे बढ़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने विश्वास जताया कि 31 दिसंबर 2029 तक देश से ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करने में सफलता मिलेगी। इसके लिए जांच एजेंसियों, राज्यों और केंद्र के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को अहम माना गया है।
युवाओं को नशे से बचाने पर सरकार का फोकस
अमित शाह के बयान में नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि युवाओं और देश के भविष्य से जुड़ी चुनौती के रूप में भी पेश किया गया। सरकार का जोर ड्रग्स की सप्लाई चेन, तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़े अपराधों पर कार्रवाई बढ़ाने के साथ संस्थागत समन्वय मजबूत करने पर है। इस अभियान की प्रगति में तय लक्ष्यों और जवाबदेही की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
Read More : Asian Games 2026 : एशियन गेम्स में भारत का डबल धमाका, शूटिंग में कांस्य और सॉफ्ट टेनिस में ऐतिहासिक पदक पक्का