Amit Shah Savarkar
Amit Shah Savarkar: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वीर सावरकर को देश में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के उनके अथक प्रयासों के लिए वह सम्मान और पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे सही मायनों में हक़दार थे। यह टिप्पणी अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में सावरकर की प्रतिमा का अनावरण करने और ‘वीर सावरकर इंस्पिरेशन पार्क’ का उद्घाटन करने के दौरान की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में विशेष रूप से सावरकर के सामाजिक सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “वीर सावरकर जी को देश में अस्पृश्यता (Untouchability) दूर करने के उनके प्रयासों के लिए कभी वह पहचान नहीं मिली जिसके वे पात्र थे।” शाह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सावरकर ने अपने राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ सामाजिक सुधारों के लिए भी महत्त्वपूर्ण कार्य किए, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया गया।
अमित शाह ने सावरकर के समाज सुधार के प्रयासों को एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने अपने समय में हिंदू समाज के भीतर व्याप्त कुरीतियों के ख़िलाफ़ बिना डरे संघर्ष किया। यह कार्य उस समय और भी चुनौतीपूर्ण था, जब रूढ़िवादी समाज में बदलाव लाना अत्यंत कठिन माना जाता था। शाह ने कहा कि सावरकर ने समुदाय के विरोध के बावजूद सामाजिक सुधारों को आगे बढ़ाना जारी रखा और समाज को प्रगति की ओर ले जाने का प्रयास किया।
अमित शाह का यह दौरा और उनकी यह टिप्पणी तब आई जब उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सावरकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। अंडमान का यह स्थान सावरकर के जीवन से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, क्योंकि उन्हें यहाँ की सेल्युलर जेल में रखा गया था। इसके साथ ही, गृह मंत्री ने ‘वीर सावरकर इंस्पिरेशन पार्क’ का भी उद्घाटन किया। इस पार्क का उद्देश्य युवाओं और नागरिकों को सावरकर के जीवन और उनके विचारों, विशेष रूप से सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता के उनके दृष्टिकोण से प्रेरित करना है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम के महत्त्व को और भी बढ़ा दिया।
बीजेपी और आरएसएस लंबे समय से वीर सावरकर के राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को राष्ट्रीय पटल पर व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास करते रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान सावरकर को महज़ एक राजनीतिक या स्वतंत्रता सेनानी के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक के रूप में भी स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। शाह ने ज़ोर दिया कि आज का भारत सावरकर के आदर्शों और उनके सामाजिक समरसता के प्रयासों को स्वीकार करे और उन्हें यथोचित सम्मान दे।
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