Amit Shah Speech : लोकसभा में मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उससे जुड़े सैन्य अभियानों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश को आज जिन सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उसकी जड़ें कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतिगत गलतियों में छिपी हैं। विशेष रूप से उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय लिए गए निर्णयों को आज की समस्याओं का कारण बताया।
अमित शाह ने संसद में स्पष्ट रूप से कहा, “सारी समस्याएं कांग्रेस की गलतियों की वजह से शुरू हुईं। अगर विभाजन के समय सही निर्णय लिए गए होते और युद्ध को एकतरफा न रोका गया होता, तो पाकिस्तान जैसी समस्या पैदा ही नहीं होती।” उन्होंने नेहरू पर आरोप लगाया कि उन्होंने 1960 में पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के तहत भारत की 80 प्रतिशत जलधारा पाकिस्तान को सौंप दी, जो कि देश के हितों के खिलाफ था।
शाह ने 1971 के शिमला समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भारत के पास पाकिस्तान पर निर्णायक दबाव बनाने का मौका था। उन्होंने कहा, “भारत के पास पाकिस्तान के 93,000 युद्धबंदी और लगभग 15,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन थी। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार यह भूल गई कि उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने की बात करनी चाहिए थी।” उन्होंने इसे एक बड़ा रणनीतिक अवसर गंवाना बताया और कहा, “उस समय अगर कब्ज़ा किए हुए कश्मीर को वापस ले लिया गया होता, तो हमें आज ऑपरेशन चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।”
गृह मंत्री ने कहा कि जब नेहरू ने युद्धविराम की घोषणा की थी, तब केवल सरदार वल्लभभाई पटेल ही थे जिन्होंने इसका विरोध किया था। शाह ने कहा, “नेहरू के एकतरफा युद्धविराम के निर्णय ने भारत को कश्मीर पर एक स्थायी समाधान से दूर कर दिया। यदि सरदार पटेल के विचारों को महत्व दिया गया होता, तो कश्मीर समस्या कभी पैदा नहीं होती।”
शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1971 में पाकिस्तान को परास्त करने की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा, “देश आज भी इंदिरा गांधी को गर्व से याद करता है और मैं भी करता हूँ। उन्होंने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था। लेकिन जब शिमला समझौते की बात आई, तो कांग्रेस सरकार कब्जे में आए इलाकों को वापस कर कश्मीर मुद्दे को पीछे छोड़ गई।” उन्होंने तंज करते हुए कहा, “अगर उस समय थोड़ा भी राजनीतिक साहस दिखाया गया होता, तो ‘सांप भी मरता और लाठी भी नहीं टूटती’।”
गृह मंत्री ने सोमवार को सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन महादेव’ का उल्लेख करते हुए बताया कि पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है। उन्होंने कहा, “हमारी सेना ने जबरदस्त पराक्रम दिखाते हुए सुलेमान, अफगान और जिबरान नाम के तीन आतंकवादियों का सफाया कर दिया।” शाह ने कहा कि ये आतंकी हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले में शामिल थे और इन्हें एक स्थानीय व्यक्ति की मदद मिली थी, जिसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी व्यक्ति ने मारे गए आतंकियों की पहचान भी की।
अमित शाह ने विपक्ष के रवैये पर तंज कसते हुए कहा, “मैं समझता था कि पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों की मौत की खबर सुनकर विपक्ष खुश होगा। लेकिन उनकी प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि वे खुश नहीं, बल्कि निराश हैं।” उन्होंने विपक्ष पर देशहित से ऊपर राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
गृह मंत्री अमित शाह का लोकसभा में दिया गया यह भाषण न केवल ऑपरेशन सिंदूर और महादेव से जुड़ी सैन्य कार्रवाई पर आधारित था, बल्कि उन्होंने इसका इस्तेमाल कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतियों पर सवाल उठाने के लिए भी किया। शाह ने नेहरू काल से लेकर शिमला समझौते तक की नीतियों को आज के कश्मीर संकट की जड़ बताया। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सेना की कार्रवाई को एक निर्णायक जवाब करार दिया और विपक्ष के रवैये को ‘राष्ट्रविरोधी मानसिकता’ से प्रेरित बताया। संसद में यह बहस आने वाले समय में सुरक्षा, कूटनीति और राजनीतिक रणनीति के नए आयामों को जन्म दे सकती है।
Read More : Nagpanchami : नागपंचमी पर कालसर्प दोष शांति और रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन, 51 जोड़ों ने लिया भाग
RCB vs GT : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक मुकाबले में गुरुवार को…
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद अब…
Kailash Kher Kedarnath : पवित्र चारधाम यात्रा के आगाज के साथ ही उत्तराखंड के हिमालयी…
Ambikapur News : शादी की खुशियां दरवाजे तक पहुंचीं ही थीं कि पुलिस की दस्तक…
Tomato Farming Profit : आज के दौर में खेती केवल पसीने बहाने का काम नहीं…
Ontario Owl Rescue : कनाडा के ओंटारियो प्रांत स्थित इनिसफिल शहर में उस वक्त हड़कंप…
This website uses cookies.