Amul milk price hike
Amul milk price hike : देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी ‘अमूल’ (Amul) ने आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका दिया है। पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की मार झेल रही जनता के लिए अब दूध खरीदना भी महंगा होने जा रहा है। अमूल ब्रांड का संचालन करने वाली संस्था ‘गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन’ (GCMMF) ने देशभर में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। यह खबर सामने आते ही आम आदमी की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि दूध हर घर की रसोई का एक अनिवार्य हिस्सा है और इसके बिना दैनिक दिनचर्या की कल्पना करना मुश्किल है।
अमूल की ओर से जारी ताजा अपडेट के अनुसार, दूध की कीमतों में की गई यह वृद्धि कल यानी 14 मई 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगी। फेडरेशन ने निर्णय लिया है कि अधिकांश दूध वेरिएंट्स पर प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि, अलग-अलग पैक साइज और दूध की श्रेणियों के आधार पर यह वृद्धि 1 रुपये से लेकर 3 रुपये तक हो सकती है। कंपनी का कहना है कि परिचालन लागत और चारे की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण यह फैसला लेना अनिवार्य हो गया था।
कीमतों में हुए इस बदलाव के बाद अमूल के विभिन्न उत्पादों के दाम अब बदल गए हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए नए रेट लिस्ट नीचे दी गई है:
अमूल ताजा (500 ML): अब 28 रुपये के बजाय 29 रुपये में मिलेगा।
अमूल ताजा (1 लीटर): इसकी कीमत 55 रुपये से बढ़कर 57 रुपये हो गई है।
अमूल गोल्ड (500 ML): अब आपको 34 रुपये के बजाय 35 रुपये चुकाने होंगे।
अमूल शक्ति (500 ML): इसकी कीमत भी 34 रुपये से बढ़कर 35 रुपये हो गई है।
अमूल टी स्पेशल (1 लीटर): चाय के शौकीनों के लिए यह बड़ा झटका है, कीमत 63 रुपये से बढ़कर 66 रुपये हो गई है।
भैंस का दूध (500 ML): इसकी कीमत में 2 रुपये की सीधी वृद्धि हुई है, अब यह 37 रुपये के बजाय 39 रुपये में मिलेगा।
दूध की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा और सबसे गहरा असर मध्यमवर्गीय परिवारों और गृहणियों के किचन बजट पर पड़ने वाला है। घर में बच्चों की डाइट से लेकर सुबह की चाय तक, दूध एक ऐसी वस्तु है जिसकी खपत में कटौती करना लगभग असंभव है। पहले से ही खाद्य तेल, सब्जियों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान जनता के लिए महीने का हिसाब-किताब बैठाना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि अमूल के इस कदम के बाद अन्य डेयरी ब्रांड्स भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
डेयरी विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक साल में पशु आहार (Fodder) की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन और बिजली के खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। डेयरी फेडरेशन का तर्क है कि किसानों को दूध का सही मूल्य देने और दूध उत्पादन की लागत को संतुलित करने के लिए समय-समय पर कीमतों में संशोधन करना जरूरी होता है। हालांकि, तर्क जो भी हो, अंतिम मार हमेशा उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ती है। कल सुबह से जब लोग दूध लेने निकलेंगे, तो उन्हें अपनी जेब से अतिरिक्त रुपये ढीले करने होंगे।
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