Aniruddhacharya : मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, जिन्हें सोशल मीडिया की दुनिया में ‘पुकी बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है, उनके व्यक्तित्व और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत उपयोग करना कानूनन अपराध है। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अनिरुद्धाचार्य के नाम, आवाज और छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल करने वाले मीम्स, वीडियो और एआई-जनित सामग्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
30 मार्च 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में जस्टिस तुषार राव गेडेला ने अनिरुद्धाचार्य द्वारा दायर मुकदमे पर विचार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके दशकों के परिश्रम और प्रतिष्ठा का परिणाम होती है। कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से Meta (फेसबुक/इंस्टाग्राम), X (पूर्व में ट्विटर) और Google (यूट्यूब) जैसी दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे वादी द्वारा चिन्हित किए गए उन सभी कंटेंट को तुरंत हटाएं, जिनमें उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि एआई या डीपफेक तकनीक का उपयोग कर बनाई गई कोई भी अपमानजनक सामग्री कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल ‘पैरोडी’ या मनोरंजन का नहीं है। अदालत ने माना कि अनिरुद्धाचार्य एक व्यापक रूप से स्वीकृत सार्वजनिक हस्ती हैं, जिनकी साख उनके आध्यात्मिक उपदेशों और सामाजिक कार्यों से बनी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मनोरंजन की सीमा पार कर किसी की छवि और प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है, तो उसे अभिव्यक्ति की आजादी नहीं माना जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि यदि इस स्तर पर राहत नहीं दी गई, तो याचिकाकर्ता को ऐसी ‘अपूरणीय क्षति’ होगी जिसकी भरपाई आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अपनी याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि कई अज्ञात संस्थाएं और व्यक्ति बिना किसी लाइसेंस या सहमति के उनकी शख्सियत (Persona) का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका मुख्य आरोप था कि उनकी छवि का इस्तेमाल कर अवैध व्यावसायिक लाभ कमाया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उजागर किया कि सोशल मीडिया पर ऐसी मनगढ़ंत सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे यह झूठा आभास होता है कि वह कुछ संदिग्ध या धोखाधड़ी वाली योजनाओं का समर्थन कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी साख गिरी है, बल्कि उनके अनुयायियों के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
कानूनी भाषा में, व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति को अपने नाम, छवि, आवाज या अन्य विशिष्ट पहचान चिन्हों के व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने का अधिकार देते हैं। भारत में हाल के वर्षों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अनिरुद्धाचार्य का यह मामला दिखाता है कि अब आध्यात्मिक क्षेत्र की हस्तियां भी अपनी डिजिटल पहचान को लेकर सजग हो गई हैं। कोर्ट का यह आदेश एआई और डीपफेक के बढ़ते दौर में एक मिसाल बनेगा, जहाँ तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की भी छवि बिगाड़ना आसान हो गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को फिर से रेखांकित किया है। अब Meta, Google और X को न केवल आपत्तिजनक सामग्री हटानी होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसे उल्लंघन दोबारा न हों। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक चेतावनी है जो केवल ‘व्यूज’ और ‘लाइक’ के चक्कर में किसी के सम्मान के साथ खिलवाड़ करते हैं। अनिरुद्धाचार्य को मिली यह कानूनी राहत उनके प्रशंसकों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जो लंबे समय से उनके खिलाफ चल रहे भ्रामक मीम्स और वीडियो का विरोध कर रहे थे।
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