Rajya Sabha Row: राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिल पर बोलते हुए केंद्र सरकार की परीक्षा प्रणाली, शिक्षा नीति और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समय पर कदम नहीं उठाए और अब राजनीतिक परिस्थितियों के दबाव में कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। उनके भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन का माहौल गर्म हो गया।
शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम पर सरकार को घेरा
अपने संबोधन में मल्लिकार्जुन खरगे ने विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षकों और कुलपतियों की नियुक्ति होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में ऐसे विचार शामिल किए जा रहे हैं, जिनका उन्होंने मनुस्मृति से संबंध बताते हुए विरोध किया। खरगे ने कहा कि ऐसी सामग्री, जो समाज में भेदभाव या असमानता को बढ़ावा देने वाली मानी जाती है, उसे शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों की नियुक्तियां बढ़ाई जा रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने सभी बच्चों को समान अवसर देने के उद्देश्य से शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया था।
मनुस्मृति वाले बयान पर सदन में हंगामा
खरगे के मनुस्मृति संबंधी बयान पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा कही गई बातें उनकी जानकारी के अनुसार तथ्यों से मेल नहीं खातीं। उन्होंने मांग की कि मनुस्मृति के मूल पाठ का प्रमाण प्रस्तुत किया जाए और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही ऐसे बयान दिए जाएं। नड्डा की इस आपत्ति के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे कुछ समय के लिए सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का उठाया मुद्दा
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने भाषण में छात्र आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च करना चाहते थे, लेकिन उन्हें कथित रूप से पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य सख्त कदम उठाए गए, जिससे कई छात्र घायल हुए। खरगे ने कहा कि यदि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है, तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इन आरोपों पर सरकार की ओर से अलग-अलग समय पर अपना पक्ष रखा गया है।
गृह मंत्री और प्रधानमंत्री पर राजनीतिक टिप्पणी
चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि वह इस पूरे मामले पर सदन में जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन के बाद दबाव में आई और उसके बाद कई फैसले लिए गए। खरगे ने दावा किया कि छात्रों के संघर्ष के कारण सरकार को अपने रुख में बदलाव करना पड़ा और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े निर्णय लेने पड़े। यह सभी टिप्पणियां विपक्ष की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा रहीं।
बयान के बाद बढ़ा विवाद, एक्सपंज की उठी मांग
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में खरगे ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कई तीखी राजनीतिक टिप्पणियां कीं। उनके एक बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। सदन के नेता जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि खरगे ने अपने भाषण में असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया है और उन्होंने सभापति से उन टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने (एक्सपंज) की मांग की। इसके बाद सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान यह विवाद प्रमुख विषय बन गया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
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