Anupama Gulati Murder Case
Anupama Gulati Murder Case: उत्तराखंड के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले ‘अनुपमा गुलाटी हत्याकांड’ में न्याय की जीत हुई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को निचली अदालत द्वारा दोषी राजेश गुलाटी को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने देहरादून की अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी और न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए राजेश की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह न्यायसंगत है।
यह मामला 17 अक्टूबर 2010 का है, जब देहरादून के एक पॉश इलाके में रहने वाले राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा की निर्मम हत्या कर दी थी। झगड़े के दौरान राजेश ने अनुपमा को धक्का दिया, जिससे उसका सिर दीवार से टकराया और वह बेहोश हो गई। राजेश को डर था कि होश में आने के बाद अनुपमा पुलिस से शिकायत करेगी, इसलिए उसने उसे मौत के घाट उतार दिया। दरिंदगी की हद पार करते हुए राजेश ने बाजार से एक इलेक्ट्रिक आरी और डीप फ्रीजर खरीदा। उसने अपनी पत्नी के शव के 72 टुकड़े किए और उन्हें फ्रीजर में छिपा दिया। वह धीरे-धीरे उन टुकड़ों को शहर के सुनसान इलाकों में फेंकता रहा।
राजेश और अनुपमा की कहानी किसी फिल्मी लव स्टोरी की तरह शुरू हुई थी। 1992 में एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मुलाकात हुई और सात साल के अफेयर के बाद 1999 में दोनों ने शादी कर ली। साल 2000 में वे अमेरिका शिफ्ट हो गए, लेकिन वहां उनके रिश्तों में कड़वाहट आने लगी। विवाद इतना बढ़ा कि अनुपमा वापस भारत आ गई, हालांकि राजेश उसे दोबारा मनाकर ले गया। वहां उनके दो जुड़वा बच्चे हुए, लेकिन झगड़े खत्म नहीं हुए। 2008 में भारत लौटने के बाद देहरादून में घरेलू हिंसा का मामला आधिकारिक तौर पर दर्ज हुआ, जहाँ राजेश को हर महीने 20 हजार रुपये देने का आदेश मिला, जिसने उसके गुस्से को और भड़का दिया।
हत्या के बाद राजेश ने अपने बच्चों को झूठ बोला कि उनकी मां नानी के घर गई है। करीब दो महीने तक अनुपमा का अपने मायके वालों से संपर्क नहीं हुआ, जिससे उनके भाई को शक हुआ। 11 दिसंबर को जब भाई ने अपने एक मित्र को पूछताछ के लिए भेजा, तो राजेश ने बहाने बनाए। अंततः 12 दिसंबर 2010 को जब अनुपमा का भाई दिल्ली से पुलिस के साथ देहरादून पहुंचा, तब इस वीभत्स कांड का खुलासा हुआ। पुलिस ने जब डीप फ्रीजर खोला, तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
देहरादून की निचली अदालत ने सितंबर 2017 में राजेश गुलाटी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 15 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माने की राशि में से 70,000 रुपये सरकारी खजाने में और शेष राशि बच्चों के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया था। अब उच्च न्यायालय के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि कानून की नजर में ऐसी जघन्य वारदात के लिए कोई माफी नहीं है। 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली इस पुष्टि ने अनुपमा के परिवार को एक बार फिर न्याय का एहसास कराया है।
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