TS Singhdeo: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी को लेकर तंज कसते हुए कहा था कि “अगर राहुल गांधी सत्ता में आए, तो भारत का हाल बांग्लादेश और नेपाल जैसा हो जाएगा।” इस पर सिंहदेव ने पलटवार करते हुए पूछा, “क्या अनुराग ठाकुर अपने सत्ता पक्ष को बांग्लादेश और नेपाल की सत्ता के समकक्ष देख रहे हैं?”
हाल ही में एक जनसभा के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों खासकर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर राहुल गांधी जैसी सोच सत्ता में आई, तो देश की स्थिरता, आर्थिक मजबूती और लोकतांत्रिक प्रणाली बांग्लादेश और नेपाल जैसी अस्थिर स्थिति में पहुंच जाएगी।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टी.एस. सिंहदेव ने कहा “राहुल गांधी कुछ करें या ना करें, वह तो बाद की बात है। लेकिन सत्ता पक्ष को इतनी असुरक्षा क्यों है कि वो इस तरह की तुलना कर रहे हैं? क्या भाजपा खुद को बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों की सत्ता के समकक्ष मान रही है?”
टी.एस. सिंहदेव ने आगे कहा कि इस तरह के बयान लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी एक जननायक हैं, चाहे सत्ता में हों या नहीं, लेकिन उन्होंने देश के अंदर जनता के मुद्दों, बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की बयानबाज़ी केवल राजनीतिक डर को दर्शाती है।”
टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में आंतरिक राजनीतिक हालात अलग हैं और भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र की तुलना उनसे करना अनुचित और भ्रामक है। उन्होंने कहा: “अनुराग ठाकुर को यह समझना चाहिए कि भारत की राजनीतिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती किसी भी पड़ोसी देश से तुलना करने की अनुमति नहीं देती। यह देश की जनता का अपमान है।”
विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा नेताओं द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाज़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। हाल के दिनों में कांग्रेस की गतिविधियों, ‘भारत जोड़ो यात्रा’, ‘न्याय योजना’ और राहुल गांधी की लोकप्रियता में वृद्धि ने सत्तारूढ़ दल की चिंताओं को बढ़ाया है।टी.एस. सिंहदेव ने इसी ओर इशारा करते हुए कहा:“अगर भाजपा को अपने काम पर भरोसा है, तो इस तरह की डर फैलाने वाली बातें करने की क्या ज़रूरत है?”
टी.एस. सिंहदेव का यह बयान सिर्फ अनुराग ठाकुर को जवाब नहीं, बल्कि लोकतंत्र के स्तर और राजनीतिक विमर्श की शालीनता की पुनर्स्थापना की मांग भी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन पड़ोसी देशों की नकारात्मक मिसाल देकर अपनी बात को मजबूती देने का प्रयास, भारत जैसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है।
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