Mahasamund Medical College Scam
Mahasamund Medical College Scam: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार और अनियमितता का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ अस्पताल की साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए मैनपावर की आपूर्ति हेतु जारी किए गए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के टेंडर में भारी धांधली की बात सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों ने इस पूरे खेल की परतों को खोल दिया है। आरोप है कि कॉलेज की क्रय समिति ने जानबूझकर सरकारी नियमों की अनदेखी की और निजी लाभ के लिए पूरी प्रक्रिया को ही संदिग्ध बना दिया।
नियमानुसार किसी भी सरकारी संस्थान में मैनपावर की आपूर्ति या अन्य खरीदारी ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होनी अनिवार्य है। हालांकि, आरटीआई से पता चला है कि क्रय समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने ऑनलाइन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया। 15 और 20 जनवरी 2025 को जब डीन उपस्थित नहीं थीं, तब समिति ने पोर्टल से महज आधे घंटे में प्रिंटआउट निकाला और सिस्टम से बाहर हो गए। इसके बाद वित्तीय बिड को पोर्टल पर जारी करने के बजाय चोरी-छिपे ऑफलाइन तरीके से कागजी खानापूर्ति कर चहेती कंपनियों को ठेका दे दिया गया।
महासमुंद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मई और जून 2025 में दो अलग-अलग कंपनियों के साथ ऑफलाइन अनुबंध किए। सफाई व्यवस्था का जिम्मा ‘मेटास सिक्योरिटी एंड फायर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड’ को 75.09 लाख रुपये में दिया गया। ठीक इतनी ही राशि (75.09 लाख रुपये) का दूसरा ठेका सुरक्षा व्यवस्था के लिए ‘बुंदेला सिक्योरिटी एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ को मिला। इस प्रकार कुल पौने दो करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन का आवंटन बिना किसी पारदर्शी प्रतिस्पर्धा के कर दिया गया। यहाँ तक कि सुरक्षा निधि (FDR) जमा करने के साक्ष्यों में भी भारी विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे भ्रष्टाचार का संदेह और गहरा गया है।
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि क्रय समिति के सदस्यों और लिपिकों ने कथित तौर पर डीन की अनुपस्थिति में उनके नाम की सील और ठप्पे का स्वयं ही इस्तेमाल कर लिया। खल्लारी विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रभारी अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है और यह सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. रेणुका गहाने ने आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया है और फाइल स्वास्थ्य आयुक्त के पास अनुमोदन के लिए भेजी गई थी। हालांकि, जब आरटीआई कार्यकर्ता ने जेम पोर्टल पर मौजूद कॉन्ट्रैक्ट ऑर्डर की कॉपी मांगी, तो कॉलेज प्रशासन ने लिखित में जवाब दिया कि ऐसी कोई कॉपी पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं है। पोर्टल से जानकारी का नदारद होना यह स्पष्ट करता है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। अब यह मामला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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