Apple ने भारत के App Store से Jack Dorsey के Bitchat ऐप को हटा दिया है। कंपनी के मुताबिक यह कदम MeitY की मांग के बाद Section 69A के तहत उठाया गया। लेकिन Apple के नोटिस में उस कथित अवैध कंटेंट की जानकारी नहीं दी गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
Apple ने भारत के App Store से Jack Dorsey के Bitchat ऐप को हटा दिया है। कंपनी के मुताबिक यह कदम MeitY की मांग के बाद Section 69A के तहत उठाया गया। लेकिन Apple के नोटिस में उस कथित अवैध कंटेंट की जानकारी नहीं दी गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

Bitchat Removed : इंटरनेट कनेक्शन के बिना लोगों को मैसेज भेजने की सुविधा देने वाला Jack Dorsey का मैसेजिंग ऐप BitChat एक बार फिर चर्चा में है। Apple ने इस ऐप को भारत के App Store से हटा दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कदम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश के बाद उठाया गया। BitChat को Twitter के को-फाउंडर Jack Dorsey ने पेश किया था और इसकी तकनीक सामान्य इंटरनेट आधारित मैसेजिंग ऐप्स से अलग है।

Jack Dorsey ने 3 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Apple की ओर से भेजे गए संदेश का स्क्रीनशॉट साझा किया। इसमें Apple की App Review टीम ने बताया कि MeitY के अनुरोध के बाद BitChat को भारतीय App Store से हटाया जा रहा है। Apple के अनुसार, सरकार ने ऐप में ऐसे कंटेंट का हवाला दिया जिसे भारत में गैरकानूनी माना गया है और इसी आधार पर ऐप को देश में उपलब्ध न रखने का निर्देश दिया गया।

Apple के संदेश के मुताबिक, BitChat को भारत के बाहर अन्य देशों में उपलब्ध रखा जाएगा। हालांकि, भारत में ऐप का TestFlight वर्जन भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। TestFlight Apple की ऐसी सेवा है, जिसका उपयोग डेवलपर्स किसी ऐप के बीटा या परीक्षण संस्करण को सीमित यूजर्स के साथ टेस्ट करने के लिए करते हैं। यानी भारत में ऐप की उपलब्धता पर रोक का असर उसके टेस्टिंग वर्जन पर भी पड़ा है।
BitChat की सबसे खास तकनीकी विशेषता इसका Bluetooth आधारित mesh networking सिस्टम है। सामान्य मैसेजिंग ऐप्स जहां इंटरनेट और केंद्रीय सर्वर पर निर्भर रहते हैं, वहीं BitChat आसपास मौजूद डिवाइस को सीधे आपस में जोड़ सकता है। एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक मैसेज पहुंचते हुए नेटवर्क में आगे भेजा जा सकता है। इसी वजह से सीमित परिस्थितियों में इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी यूजर्स के बीच संचार संभव हो सकता है।
BitChat इससे पहले जुलाई 2026 में भी चर्चा में आया था। जंतर-मंतर के पास इंटरनेट सेवा बंद रहने के दौरान CJP के कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर इस ऐप के जरिए एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखा था। इंटरनेट बंद होने की स्थिति में इसके इस्तेमाल ने ऐप को लेकर सार्वजनिक और सरकारी स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। बाद में ऐप फिर भारत में उपलब्ध हो गया था।

2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास करीब 1.5 किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 12 घंटे इंटरनेट सेवा बंद रहने और दिल्ली तथा मुंबई में CJP के प्रदर्शनों के बाद BitChat को लेकर चर्चा फिर तेज हुई। इसके बाद 3 अक्टूबर को Jack Dorsey ने Apple का वह संदेश सार्वजनिक किया, जिसमें भारत में ऐप की उपलब्धता हटाने की जानकारी दी गई थी। घटनाक्रम ने ऐप और इंटरनेट स्वतंत्रता को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया।
Apple के अनुसार, MeitY ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की Section 69A के तहत BitChat को भारत के App Store से हटाने का निर्देश दिया। Section 69A के तहत सरकार को कुछ परिस्थितियों में ऑनलाइन सूचना या डिजिटल सामग्री की सार्वजनिक पहुंच को ब्लॉक करने का अधिकार प्राप्त है। इस मामले में Apple ने कहा कि निर्देश भारत में ऐप की उपलब्धता से संबंधित था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार को चिंता है कि BitChat जैसी तकनीक का इस्तेमाल गुप्त रूप से लोगों को जोड़ने, गैरकानूनी भीड़ जुटाने या कुछ आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, ये संभावित जोखिम हैं और ऐप द्वारा किसी विशेष गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम दिए जाने का दावा अलग तथ्य है। सरकार की ओर से हटाने के आदेश का पूरा सार्वजनिक विवरण सामने आना इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
डिजिटल अधिकार संगठन Internet Freedom Foundation ने BitChat को हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। संगठन का तर्क है कि BitChat का अपना केंद्रीय सर्वर नहीं है और यह स्वयं कंटेंट होस्ट नहीं करता। संगठन ने सरकार से कार्रवाई के आधार और संबंधित आदेश को सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही, उसने ऐप को हटाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है।
BitChat को भारत के App Store से हटाए जाने के बाद तकनीक, डिजिटल अधिकार, इंटरनेट उपलब्धता और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती है। फिलहाल Apple की ओर से हटाने की पुष्टि और MeitY के निर्देश की जानकारी सामने आई है, जबकि आदेश के विस्तृत आधार को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। ऐसे में आगे सरकार की ओर से स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज सामने आने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
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