West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेपाल में हुई हिंसा को लेकर भाजपा नेता और पूर्व सांसद अर्जुन सिंह के विवादित बयान के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन पर हिंसा भड़काने और साजिश रचने का आरोप लगाते हुए बैरकपुर जिले के कई थानों में FIR दर्ज कराई है। जवाब में अर्जुन सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री से कहें कि मेरे नाम पर 400 पुलिस थानों में FIR दर्ज करें, कोई फर्क नहीं पड़ता।”

TMC का आरोप: भड़काऊ बयान देकर युवाओं को उकसाया
टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने आरोप लगाया कि अर्जुन सिंह युवाओं को सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं और बंगाल की शांति व्यवस्था को खतरे में डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद बैरकपुर के कई थानों में अर्जुन सिंह के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं।

अर्जुन सिंह का जवाब: मैंने सच कहा, डरने वाला नहीं
एफआईआर दर्ज होने के बाद अर्जुन सिंह ने कहा”मैंने कुछ गलत नहीं कहा। नेपाल में 18 से 30 साल के युवाओं ने सरकार बदल दी, क्योंकि वहां सिर्फ 10% भ्रष्टाचार है। बंगाल में हालात कहीं ज्यादा खराब हैं। यहां लड़कियों के साथ बलात्कार हो रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री चुप हैं।” उन्होंने आगे कहा “टीएमसी सरकार हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार में डूबी है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या राशन। अगर यूपीएससी में भ्रष्टाचारियों की रैंकिंग होती, तो ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और पार्थ चटर्जी टॉप तीन में होते।”
‘400 FIR कराएं, फर्क नहीं पड़ता’
अर्जुन सिंह ने चुनौती भरे लहजे में कहा”मैं पार्थ भौमिक को चुनौती देता हूं कि मुख्यमंत्री से कहें कि मेरे खिलाफ 400 थानों में एफआईआर दर्ज करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मेरा सम्मान नहीं रहेगा। मैं हर एफआईआर का सामना करूंगा, लेकिन अपने विचार नहीं बदलूंगा।”
नेपाल हिंसा से जोड़ा था बंगाल का मुद्दा
अर्जुन सिंह का विवादित बयान नेपाल में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों पर आधारित था। उन्होंने कहा था कि “जिस तरह नेपाल में युवाओं ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई, वैसे ही बंगाल के युवाओं को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।”TMC ने इस बयान को “राज्य में हिंसा भड़काने की कोशिश” बताया और इसे “सोची-समझी साजिश” करार दिया।

सियासी तूफान की आहट
पश्चिम बंगाल में पहले से ही सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी बीजेपी के बीच तनावपूर्ण माहौल है। अर्जुन सिंह के इस बयान और उसके बाद हुई FIR की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और भी तीखी हो सकती है। क्या यह बयानबाज़ी राजनीतिक जागरूकता बढ़ाएगी या फिर राज्य में अशांति को जन्म देगी, यह तो समय ही बताएगा?
