Arunachal China Border: अरुणाचल प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) ने एक बार फिर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पर राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में कथित घुसपैठ का आरोप लगाया है। पार्टी के मुताबिक, चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास टक्सिंग सर्कल और आसपास के कुछ बॉर्डर पॉइंट पर चीनी सैनिकों की गतिविधियां देखी गई हैं। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारतीय सेना पहले भी इस तरह के जमीन पर कब्जे या घुसपैठ संबंधी दावों को खारिज कर चुके हैं।

PPA की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में उठे सवाल
PPA की ओर से तैयार की गई फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में सीमा से लगे इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी को गंभीर मुद्दा बताया गया है। पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकार से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क तेजी से विकसित करने, सुरक्षा बलों के लिए स्थायी बेस कैंप बनाने और संचार व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि दुर्गम इलाकों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी बेहद जरूरी है।

शेरा-5 और नांगा पहाड़ को लेकर दावा
रिपोर्ट में PPA ने दावा किया है कि LAC के करीब स्थित शेरा-5 पॉइंट और नांगा पहाड़ इलाके में स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सीमित हो गई है। पार्टी का कहना है कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की गतिविधियों और आवागमन को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। PPA ने केंद्र सरकार से इन क्षेत्रों में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी स्थिति की व्यापक समीक्षा करने की मांग की है।
चीन की गतिविधियों को लेकर PPA ने जताई चिंता
PPA ने अपनी रिपोर्ट में चीन की गतिविधियों को कथित तौर पर लंबे समय से चल रहे एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा बताया है। पार्टी का कहना है कि सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियां अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया के रूप में देखी जानी चाहिए। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का आधिकारिक रुख इन आरोपों से अलग रहा है।
27 जगहों के नाम बदलने से बढ़ी चर्चा
इसी बीच भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की 27 भौगोलिक जगहों के लिए मानकीकृत आधिकारिक नाम तय किए हैं। इसके बाद सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने आधिकारिक मानचित्र को भी अपडेट किया है। रिपोर्टों के अनुसार, नए नामों में 21 जमीनी क्षेत्रों, चार दर्रों, एक ऊंचाई वाले ग्लेशियल झील क्षेत्र और 1962 के भारत-चीन युद्ध के एक वीर सैनिक के स्मारक से जुड़े स्थान का नामकरण शामिल है। इस कदम को सीमा क्षेत्र में भारत के प्रशासनिक और मानचित्र संबंधी दावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चीन ने मैप अपडेट पर जताई आपत्ति
भारत के आधिकारिक मानचित्र में बदलाव के कुछ दिनों बाद चीन की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। चीन अरुणाचल प्रदेश और उससे लगे क्षेत्रों को ‘जांगनान’ नाम से संबोधित करता है और इन क्षेत्रों पर अपना दावा जताता रहा है। चीन का कहना है कि इन इलाकों के लिए मानकीकृत नाम जारी करना उसके कथित क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़ा मामला है। भारत लगातार अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और चीन के ऐसे दावों को खारिज करता है।
सीमा विवाद के बीच बातचीत भी जारी
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद बना हुआ है। दोनों देशों के बीच LAC पर तनाव कम करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। ऐसे में नए स्थानों के नाम और सीमा क्षेत्र में कथित गतिविधियों को लेकर सामने आने वाले दावे विवाद को और संवेदनशील बना सकते हैं। इसके बावजूद दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने के रास्ते खुले रखने पर जोर देते रहे हैं।
सुरक्षा बलों की गश्त पर कमेटी की रिपोर्ट
PPA की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय सुरक्षा बल सीमा से लगे इलाकों में सालभर गश्त करते हैं। हालांकि, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, खराब मौसम और भारी बारिश के कारण नियमित गश्त की गतिविधियां मुख्य रूप से अप्रैल से अक्टूबर के बीच अधिक होती हैं। कमेटी ने जमीनी स्थिति को समझने के लिए टक्सिंग, माजा और गैलेमो के स्थानीय निवासियों से बातचीत करने का दावा किया है।
सेना के अधिकारियों और जवानों से भी बातचीत
कमेटी के अनुसार, स्थानीय लोगों के अलावा क्षेत्र में तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और भारतीय सेना के जवानों से भी बातचीत की गई। रिपोर्ट तैयार करने का उद्देश्य सीमा क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय आबादी की स्थिति को समझना बताया गया है। PPA ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल दूर से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों से बातचीत के आधार पर किया जाना चाहिए।
शेरा-5 को लेकर सामने आया पुराना दावा
कमेटी ने एक स्थानीय युवक के हवाले से शेरा-5 से जुड़ी एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, शेरा-5 भारतीय क्षेत्र के अंदर स्थित एक पेट्रोलिंग पॉइंट है, जहां कथित तौर पर चीनी PLA सैनिकों और अरुणाचल स्काउट्स के बीच आमना-सामना हुआ था। यह दावा कमेटी की रिपोर्ट में स्थानीय स्रोत के हवाले से किया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
2023 के बाद पेट्रोलिंग को लेकर सवाल
PPA की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2023 में भारतीय सैनिक शेरा-5 क्षेत्र से पीछे हट गए थे और उसके बाद कथित तौर पर वहां दोबारा नहीं लौटे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाद में चीनी PLA के जवान उस स्थान पर पहुंचे और वहां भारतीय गश्ती दल द्वारा छोड़ी गई कथित प्रतीकात्मक निशानियों को नष्ट कर दिया। इन दावों पर भी आधिकारिक स्तर से स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग
PPA ने केंद्र सरकार से सीमा क्षेत्रों में सड़क, संचार और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की मांग दोहराई है। पार्टी का कहना है कि दुर्गम सीमावर्ती इलाकों तक हर मौसम में पहुंच सुनिश्चित करना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा स्थायी सैन्य और सुरक्षा ठिकानों तथा बेहतर संचार नेटवर्क से किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
अरुणाचल प्रदेश में कथित चीनी घुसपैठ को लेकर PPA की रिपोर्ट ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहस तेज कर दी है। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए दावों और शेरा-5 से जुड़ी घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में अंतिम स्थिति स्पष्ट करने के लिए केंद्र सरकार, भारतीय सेना और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग लगातार उठ रही है।
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