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Ayushman Bharat Scheme : मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत योजना सवालों के घेरे में, बकाया राशि पर उठे गंभीर सवाल

Ayushman Bharat Scheme : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत योजना संकट में घिरती नजर आ रही है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने देशभर में गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं देने का वादा किया था, लेकिन इस योजना में काफी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अनुसार, केंद्र सरकार पर निजी अस्पतालों का 1.21 लाख करोड़ रुपये का बकाया है, जो अब तक नहीं चुकाया गया है।

बकाया राशि का भुगतान 15 दिनों में करना था

IMA का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए निर्धारित 15 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान किया जाना था, लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ 5 प्रतिशत मामलों में ही चिकित्सा व्यय 15 दिनों के भीतर मिल पाता है। बाकी मामलों में अस्पतालों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता है, जिसके कारण अस्पतालों के सामने गंभीर वित्तीय संकट उत्पन्न हो रहा है। इसके बावजूद, 6.7 मिलियन मरीजों को सेवाएं देने के बावजूद अस्पतालों को अपेक्षित भुगतान नहीं किया गया है।

अस्पतालों की रुचि घट रही है

आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। IMA का आरोप है कि केंद्र की उदासीनता और भुगतान में देरी के कारण निजी अस्पतालों की योजना में रुचि घट रही है। अस्पतालों को इलाज की वास्तविक लागत के मुकाबले बहुत कम भुगतान किया जा रहा है, और वह भी समय पर नहीं। इसके परिणामस्वरूप, अस्पतालों के लिए इस योजना में शामिल होना फायदे का सौदा नहीं रह गया है, और यह योजना आम लोगों तक सही से पहुंचने में विफल हो रही है।

आयुष्मान भारत की शुरुआत

आयुष्मान भारत योजना का प्रारंभ 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की स्वास्थ्यसाथी योजना के मॉडल पर किया था। इस योजना के तहत देशभर के नागरिकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान किया जाता है। अब तक 41 करोड़ आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जा चुके हैं, और इसका उद्देश्य लाखों गरीबों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना था। हालांकि, योजना की शर्तें काफी कड़ी हैं, जिससे कई गरीब लोग लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।

बंगाल के मॉडल से मेल खाती योजना

हालांकि, बंगाल में स्वास्थ्यसाथी योजना के तहत सभी लोगों को लाभ मिल रहा है, लेकिन आयुष्मान भारत योजना में कई कड़ी शर्तें हैं, जिसके कारण कुछ वर्गों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। विशेष रूप से गरीब लोग योजना का लाभ लेने में सक्षम नहीं होते। दूसरी ओर, बंगाल में सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर सभी लोग स्वास्थ्यसाथी योजना का लाभ उठाते हैं, जबकि आयुष्मान भारत योजना में लाभार्थियों की संख्या सीमित है।

क्या है आयुष्मान भारत का भविष्य?

वर्तमान में, इस योजना के तहत अस्पतालों की रुचि में कमी और बकाया राशि के भुगतान में देरी के कारण यह सवाल उठता है कि क्या आयुष्मान भारत योजना भविष्य में सफल हो पाएगी। यदि सरकार ने समय रहते अस्पतालों के बकाए का भुगतान नहीं किया और योजना के संचालन में सुधार नहीं किया, तो यह योजना गरीबों के लिए एक सपने से ज्यादा कुछ नहीं बन पाएगी।

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