Azam Khan Johar University : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़ी जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संभावित कार्रवाई चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब अधिकारियों द्वारा बयानों और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से 24 अक्टूबर के बाद कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, हालांकि गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
85.81 करोड़ रुपये के सरकारी निर्माण कार्य जांच के दायरे में
जांच का प्रमुख पहलू यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी धन से कराए गए कथित निर्माण कार्य हैं। ED से जुड़ी जानकारी के अनुसार, करीब 85.81 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण कार्य जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि सरकारी धन का इस्तेमाल परिसर में पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल जैसी इमारतों तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण में किया गया। जांच एजेंसी इन कार्यों के लिए जारी धन, उसके वास्तविक उपयोग और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
विधायक और विधान परिषद सदस्य निधि के इस्तेमाल पर सवाल
मामले में आरोप है कि विधायक क्षेत्र विकास निधि और विधान परिषद सदस्य क्षेत्र विकास निधि से भी यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर लगभग 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए गए। इसके अलावा, सरकारी ठेकों के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई निर्माण सामग्री को कथित तौर पर निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, निर्माण संबंधी दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान किया जा रहा है।
अजीमनगर थाने में दर्ज है मुकदमा
इस मामले में ED की आधिकारिक शिकायत के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान, जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है। शिकायत और शुरुआती जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण से जुड़े 416.14 करोड़ रुपये के कथित अस्पष्टीकृत खर्च का मामला भी सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी इस खर्च के स्रोत, भुगतान के विवरण और निर्माण कार्यों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
सरकारी धन से बने भवनों पर कुर्की की आशंका
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बयान दर्ज करने के बाद ED अब उपलब्ध वित्तीय साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। यदि जांच में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने जैसी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, ऐसी कार्रवाई का फैसला कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगा।
गिरफ्तारी की अटकलों के बीच आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
24 अक्टूबर के बाद संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की की संभावना फिलहाल सूत्रों के हवाले से सामने आई है, इसे निश्चित कार्रवाई नहीं माना जा सकता। मामले में अंतिम स्थिति ED के आधिकारिक बयान या संबंधित कानूनी आदेशों से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल जांच का केंद्र सरकारी धन के इस्तेमाल, निर्माण कार्यों और वित्तीय दस्तावेजों में कथित विसंगतियों पर बना हुआ है।
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