Bajrang Dal Controversy
Bajrang Dal Controversy: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित देव बलौदा (चरोदा) में 13वीं शताब्दी के प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया था। 15 और 16 फरवरी को आयोजित इस मेले में क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए। हालांकि, सोमवार को यह धार्मिक उत्सव उस समय विवादों में घिर गया जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मेले में घूम-घूम कर दुकानदारों के नाम पूछना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मुस्लिम व्यापारी अपनी पहचान छिपाकर यहां व्यापार कर रहे हैं, जिसके बाद मेले में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।
विवाद की मुख्य जड़ एक गुपचुप (पानी-पुरी) के ठेले से शुरू हुई। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने बताया कि एक ठेले पर ‘अजीत चाट भंडार’ और ‘जय माता दी’ लिखा हुआ था, जिससे लोग उसे हिंदू की दुकान समझकर खा रहे थे। लेकिन जब एक ग्राहक ने ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन किया, तो स्क्रीन पर ‘भाईजान चाट वाला’ नाम प्रदर्शित हुआ। इस घटना के बाद बजरंग दल ने इसे ‘पहचान का संकट’ और ‘थूक व मूत्र जिहाद’ की साजिश करार देते हुए हंगामा शुरू कर दिया और मुस्लिम दुकानदारों को तुरंत बोरिया-बिस्तर समेटने को कहा।
मेले के दौरान सामने आए वीडियो में बजरंग दल के कार्यकर्ता दुकानदारों के साथ दुर्व्यवहार करते और उन्हें अपशब्द कहते देखे गए। एक मुस्लिम महिला दुकानदार, जो भगवान की तस्वीरें बेच रही थी, उसे निशाना बनाते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनके समाज के लोग हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। जब महिला ने दलील दी कि इसमें उसकी क्या गलती है, तो कार्यकर्ता ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “तुम्हारी सबसे बड़ी गलती यही है कि तुम मुसलमान हो।” इस दौरान दुकानदारों पर दबाव बनाया गया कि वे ‘जय श्री राम’ के नारे लगाएं और मंदिर परिसर छोड़कर मस्जिदों के सामने दुकान लगाएं।
हंगामे के दौरान कार्यकर्ताओं ने व्यापारियों से सवाल किया कि गरियाबंद में हुई घटना के विरोध में कोई मुस्लिम समाज का व्यक्ति सामने क्यों नहीं आया। कार्यकर्ताओं ने मौके पर मौजूद पुलिस और निगम प्रशासन को भी निर्देश दिए कि वे मुस्लिम दुकानदारों का सामान जब्त करें और उन्हें वहां से खदेड़ें। हैरान करने वाली बात यह रही कि सीएसपी छावनी और भिलाई-3 थाना प्रभारी की मौजूदगी के बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही और कार्यकर्ताओं ने खुद ही दुकानों को बंद कराना और खरीदे हुए सामान को वापस करवाना शुरू कर दिया।
इस कार्रवाई से आहत मुस्लिम व्यापारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। एक बुजुर्ग व्यापारी ने कहा, “हम पिछले 20-25 सालों से देव बलौदा के इस मेले में अपनी दुकान लगा रहे हैं। हमें हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। हम यहाँ केवल दो पैसे कमाने और अपना परिवार पालने आते हैं।” व्यापारियों का कहना है कि बाजार में हर धर्म और जाति के लोग होते हैं, लेकिन इस तरह एक समुदाय विशेष को लक्षित करना और उनके व्यापार को बंद कराना अलोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण है।
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