Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में करीब 26 साल से लापता एक व्यक्ति का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ग्राम तमोरा निवासी पंचराम मंडावी वर्ष 2000 में अचानक लापता हो गए थे। इतने लंबे समय तक उनका कोई सुराग नहीं मिलने के बाद अब मामले में नया मोड़ आया है। परिजनों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के निर्देश पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपहरण का अपराध दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू की है।
वर्ष 2000 में अचानक घर से गायब हुए पंचराम
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, ग्राम तमोरा निवासी राम कुमार मंडावी ने अपने भाई पंचराम के लापता होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में पंचराम बिना किसी को कुछ बताए अचानक घर छोड़कर चले गए थे। शुरुआत में परिवार को लगा कि वह किसी काम से बाहर गए होंगे, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटे, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।
गांव से जंगलों तक परिजनों ने की तलाश
पंचराम के लापता होने के बाद परिवार ने उनकी तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी। परिजनों ने गांव, आसपास के वन क्षेत्रों और दूर-दराज में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां जाकर जानकारी जुटाने का प्रयास किया। कई महीनों तक खोजबीन जारी रही, लेकिन उनके बारे में कोई ठोस सूचना नहीं मिल सकी। समय बीतने के साथ परिवार की परेशानी बढ़ती गई और पंचराम के लापता होने का रहस्य अनसुलझा बना रहा।
तस्वीर नहीं होने से तलाश में आई परेशानी
इस मामले की एक बड़ी चुनौती यह है कि परिजनों के पास पंचराम मंडावी की कोई पुरानी या हालिया तस्वीर भी उपलब्ध नहीं है। तस्वीर नहीं होने के कारण उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करने और संभावित सुरागों की पुष्टि करने में मुश्किलें आती रही हैं। इतने वर्षों बाद उनकी तलाश करना पुलिस और परिवार, दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पुलिस ने कंट्रोल रूम और थानों को भेजी थी सूचना
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने शुरुआती दौर में गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तलाश के प्रयास किए थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पंचराम का रंग सांवला और कद लगभग पांच फीट तीन इंच बताया गया था। उनकी गुमशुदगी की सूचना जिला पुलिस कंट्रोल रूम, जिला अपराध शाखा और जिले के विभिन्न थानों तक पहुंचाई गई थी। सीमावर्ती पुलिस चौकियों को भी जानकारी भेजी गई, ताकि दूसरे क्षेत्रों में कोई सुराग मिलने पर कार्रवाई की जा सके। इसके बावजूद वर्षों तक उनकी स्थिति का पता नहीं चल पाया।
हाईकोर्ट के निर्देश पर अपहरण का अपराध दर्ज
लंबे समय तक मामले में प्रगति नहीं होने के बाद यह प्रकरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के सामने पहुंचा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 25 मई को जारी न्यायालय के निर्देशों के पालन में बालोद थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया है। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
क्या पंचराम को अगवा कर कहीं छिपाया गया था?
पुलिस के अनुसार, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पंचराम मंडावी का किसी अज्ञात व्यक्ति ने गलत इरादे से अपहरण किया हो और उन्हें किसी गुप्त स्थान पर रखा गया हो। हालांकि, यह फिलहाल जांच का विषय है। अभी तक उपलब्ध जानकारी में अपहरण की पुष्टि करने वाला कोई निर्णायक सुराग सामने नहीं आया है और न ही किसी संदिग्ध की पहचान बताई गई है।
26 साल पुराने रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद
हाईकोर्ट के निर्देश पर अपहरण का अपराध दर्ज होने से परिवार को मामले में आगे की कार्रवाई की उम्मीद जगी है। अब जांच के दौरान पुलिस पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध बयानों और संभावित परिस्थितियों की पड़ताल कर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2000 में पंचराम मंडावी के साथ आखिर क्या हुआ था। क्या वह कहीं जीवित हैं या उनके लापता होने के पीछे कोई आपराधिक साजिश थी? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
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