Baloda Bazar Violence
Baloda Bazar Violence: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदा बाजार आगजनी और हिंसा कांड में पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। 10 जून 2024 को हुई इस भयावह घटना के लगभग दो साल के लंबे अंतराल और गहन जांच के बाद अब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के शीर्ष नेतृत्व पर शिकंजा कसा गया है। शनिवार की देर रात पुलिस ने संगठन के कद्दावर नेताओं को हिरासत में लिया, जिसके बाद से पूरे जिले में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इस मामले में अब तक गिरफ्तारियों का आंकड़ा 200 के पार पहुँच चुका है, लेकिन ताजा कार्रवाई ने इस केस को एक नया मोड़ दे दिया है।
विश्वस्त सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव को हिरासत में लिया है। अजय यादव को संगठन के एक अन्य वरिष्ठ नेता और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल का बेहद करीबी माना जाता है। उनके साथ ही जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री दिनेश वर्मा को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने अभी तक इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन पुलिस लाइन स्थित आजाक थाना और कोतवाली थाने के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा घेरा यह साफ संकेत दे रहा है कि कार्रवाई को अंजाम दिया जा चुका है।
जैसे ही अजय यादव और दिनेश वर्मा की गिरफ्तारी की खबर फैली, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता कोतवाली थाने के सामने एकत्रित होने लगे। कार्यकर्ताओं में पुलिस की इस गुप्त कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रकांत यदु ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके नेताओं को बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कानूनी प्रक्रिया के ही उठा लिया गया है। शहर में किसी भी संभावित विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस हाई अलर्ट पर है।
बलौदा बाजार में हुई इस भीषण हिंसा की जड़ें सतनामी समाज की आस्था से जुड़ी हुई हैं। दरअसल, गिरौदपुरी धाम के पास स्थित महकोनी की ‘अमर गुफा’ में पवित्र ‘जोड़ा जैतखाम’ को उपद्रवियों द्वारा काटे जाने की घटना हुई थी। इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई से समाज असंतुष्ट था। इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए 10 जून 2024 को बलौदा बाजार के दशहरा मैदान में सतनामी समाज ने एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन के दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और शांतिपूर्ण आंदोलन ने देखते ही देखते एक उग्र और हिंसक दंगे का रूप ले लिया।
उस दिन हुई हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय को आग के हवाले कर दिया था। इसके अलावा संयुक्त कलेक्ट्रेट कार्यालय और तहसील कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की गई थी। उपद्रवियों ने वहां खड़े दर्जनों सरकारी और निजी वाहनों को भी फूंक दिया था। इस पूरी घटना को लेकर बलौदा बाजार सिटी कोतवाली में कुल 13 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। इस मामले में कांग्रेस के नेताओं, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और क्रांति सेना के कई पदाधिकारियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अधिकांश मामलों में कोर्ट में चालान पेश कर चुकी है और गवाही की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, लेकिन अजय यादव की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ने वाला है।
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