Balrampur Opium
Balrampur Opium: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती का जाल उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरा निकलता जा रहा है। कुसमी ब्लॉक के ग्राम त्रिपुरी में 4.75 करोड़ रुपये की अफीम जब्त होने के बाद अब खजूरी क्षेत्र में भी नशे के इस काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई ने न केवल भारी मात्रा में अफीम की फसल को नष्ट किया है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के अंतरराज्यीय संबंधों की भी पुष्टि की है। हालांकि, इस संगठित गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
बलरामपुर जिले में अफीम की खेती के दो बड़े मामले सामने आने के बाद अब सरकारी तंत्र की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महीनों से खेतों में अफीम की फसल खड़ी थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है; कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतनी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती संभव नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि यदि झारखंड की सीमा से लगे अन्य दुर्गम क्षेत्रों का सघन सर्वे किया जाए, तो अफीम की खेती के कई और चौंकाने वाले मामले उजागर हो सकते हैं।
कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत खजूरी के अंतर्गत आने वाले तुर्रीपानी क्षेत्र में अफीम की खेती की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। बुधवार रात को ही पुलिस की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके को घेर लिया। पूरी रात पुलिसकर्मियों ने फसल की रखवाली की ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। गुरुवार सुबह संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, कलेक्टर राजेंद्र कटारा और एसपी वैभव बैंकर ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए।
जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि झारखंड की सीमा से महज एक किलोमीटर दूर पहाड़ी और दुर्गम इलाके को तस्करों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। लगभग डेढ़ से दो एकड़ भूमि पर पांच अलग-अलग स्थानों पर अफीम की खेती की जा रही थी। यहां तक पहुँचने के लिए अधिकारियों को कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, झारखंड के चतरा जिले के तस्करों ने स्थानीय लोगों को लालच देकर यह खेती करवाई थी। मुख्य आरोपी होली के त्योहार पर अपने गांव गए थे और तब से वापस नहीं लौटे हैं, जिसकी वजह से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
तस्करों ने अफीम की निगरानी और फलों से दूध (लेटेक्स) निकालने के लिए स्थानीय ग्रामीणों का सहारा लिया था। मौके पर अफीम के फलों पर चीरा लगाए जाने के निशान मिले हैं, जिससे स्पष्ट है कि नशीले पदार्थ की एक बड़ी खेप पहले ही निकाली और खपाई जा चुकी है। इस मामले में पुलिस ने टुवेला और सहादुर नामक दो स्थानीय व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि एनडीपीएस एक्ट के सख्त प्रावधानों के तहत जब्ती की कार्रवाई की जा रही है और गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए जांच जारी है।
बलरामपुर की इन घटनाओं ने राजधानी रायपुर तक हलचल पैदा कर दी है। संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने बताया कि शासन स्तर से कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि केवल बलरामपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें अब सुदूर वनांचलों और ‘पड़ती भूमि’ का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भू-स्वामी और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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