Balrampur Opium : बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम त्रिपुरी में सिर्फ अफीम की खेती ही नहीं की जा रही थी, बल्कि उससे अफीम तैयार करने की प्रक्रिया भी सुनियोजित तरीके से शुरू कर दी गई थी। खेतों में लगे अफीम के फलों पर कई-कई चीरे लगे मिले और पास ही साल के पेड़ पर लटके दो डिब्बों में 960 ग्राम और 840 ग्राम लेक्टस (अफीम का कच्चा रस) बरामद हुआ। इससे आशंका है कि यहां कई दिनों से अफीम का रस एकत्र कर उसे तैयार करने का काम चल रहा था और संभव है कि कुछ मात्रा पहले ही खपाई भी जा चुकी हो।
मंगलवार को त्रिपुरी में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद रात हो जाने के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी। फसल की सुरक्षा के लिए पुलिस जवानों को तैनात किया गया था। बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट बलरामपुर, कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर की मौजूदगी में संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, फॉरेंसिक टीम, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने एनडीपीएस एक्ट के तहत पूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए गांव के लोगों की मदद से अफीम की फसल उखड़वाई। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
फसल उखाड़ने के दौरान खेत के पास साल के पेड़ पर दो डिब्बे लटके मिले। जांच करने पर इनमें अफीम का कच्चा रस यानी लेक्टस पाया गया। एक डिब्बे में 960 ग्राम और दूसरे में 840 ग्राम रस भरा था। जांच में यह भी सामने आया कि खेत में लगे अधिकांश फलों पर कई बार चीरा लगाया गया था और अधिकांश फल सूखने की स्थिति में थे, जिससे स्पष्ट है कि मजदूर कई दिनों से रस निकालकर डिब्बों में जमा कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर अफीम की खेती मिली है वह ग्राम सरनाटोली के रूपदेव और कोसिल की बताई जा रही है। राजस्व रिकॉर्ड की गिरदावरी में यह जमीन पड़त दर्ज थी, जबकि मौके पर अफीम की फसल लहलहा रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष इसी जमीन पर मिर्च की खेती हुई थी। यह क्षेत्र मिर्च उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार झारखंड के एक व्यक्ति द्वारा जमीन लीज पर लेकर अफीम की खेती किए जाने की बात सामने आ रही है।
इस मामले में पुलिस ने अब तक सात लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें जमीन के दोनों मालिक, एक बिचौलिया और खेत में काम करने वाले कुछ मजदूर शामिल हैं। हालांकि अभी तक पुलिस या प्रशासन की ओर से मुख्य आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि पकड़े गए लोगों ने ही अफीम की खेती की हो और जांच से बचने के लिए झारखंड के किसी व्यक्ति का नाम सामने ला रहे हों।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित जांच टीम भी बुधवार को त्रिपुरी पहुंची। पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम के संयोजकत्व में गठित इस टीम में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह सहित अन्य कांग्रेसी शामिल थे। टीम ने ग्रामीणों से बातचीत करने के साथ ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भी चर्चा की। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि कुछ महीने पहले ग्राम सरपंच ने कुसमी पुलिस को इसकी सूचना दी थी तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि त्रिपुरी बस्ती से दूर तीन ओर जंगल से घिरे इलाके में अफीम की खेती इसलिए की जा रही थी ताकि लोगों की नजर से बचा जा सके। हालांकि खेत में काम करने वाले लोगों की संदिग्ध गतिविधियों और अलग तरह की फसल को देखकर स्थानीय लोगों को संदेह हुआ। दावा किया जा रहा है कि दुर्ग जिले में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद एक स्थानीय व्यक्ति को शक हुआ और उसने मैदानी वन कर्मचारी को व्हाट्सएप पर फोटो भेज दी। इसके बाद प्रशासन को सूचना मिली और पूरे मामले का खुलासा हो गया।
अफीम फसल को जब्त कर लिया गया है। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे भी पूछताछ की जा रही है। इनमें जमीन मालिक, बिचौलिया तथा मजदूर शामिल हैं। इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी जांच कराएंगे।
राजेंद्र कटारा
कलेक्टर बलरामपुरन्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में एनडीपीएस एक्ट के प्रविधानों का पालन करते हुए फसल जब्ती की प्रक्रिया पूरी की गई है। प्रकरण की जांच चल रही है। कल तक स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। अफीम की खेती से जुड़े सारे तथ्यों को सामने लाया जाएगा।
वैभव बैंकर
पुलिस अधीक्षक बलरामपुर
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