Ban Harijan Word
Ban Harijan Word: हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक दूरगामी सुधार करते हुए ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्पष्ट निर्देशों के बाद, राज्य के मुख्य सचिव कार्यालय ने मंगलवार को इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इस आदेश के तहत अब हरियाणा के किसी भी सरकारी दस्तावेज, पत्राचार, प्रमाण पत्र या आधिकारिक अधिसूचना में इन शब्दों का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। सरकार का यह कदम समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवैधानिक समानता और सम्मान को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देश में इस बदलाव के पीछे के कानूनी और संवैधानिक तर्कों को स्पष्ट किया गया है। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद या प्रावधान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की पहचान के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं किया गया है। सरकार के अनुसार, प्रशासन में केवल उन्हीं शब्दों का उपयोग किया जाना चाहिए जो संवैधानिक रूप से मान्य हों। यह निर्णय पूरे मामले की गहन समीक्षा और कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के बाद लिया गया है, ताकि प्रशासनिक कामकाज में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता या असंवैधानिक संबोधन की गुंजाइश न रहे।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो ‘हरिजन’ शब्द का प्रचलन महात्मा गांधी के समय से हुआ था। गांधीजी ने दलित समुदाय के प्रति सम्मान प्रकट करने और छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म करने के उद्देश्य से उन्हें ‘हरिजन’ कहना शुरू किया था, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘भगवान की संतान’। साल 1933 में उन्होंने इसी नाम से एक साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया था। हालांकि, समय के साथ इस शब्द को लेकर सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण बदलते गए। कई समूहों ने इसे संबोधन के तौर पर स्वीकार किया, तो कई ने इसे संवैधानिक पहचान के आड़े आने वाला माना।
जहाँ महात्मा गांधी ने ‘हरिजन’ शब्द को लोकप्रिय बनाया, वहीं भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इस शब्द के बजाय ‘दलित’ या संवैधानिक रूप से ‘अनुसूचित जाति’ शब्द के इस्तेमाल पर जोर दिया था। दूसरी ओर, ‘गिरिजन’ शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों में रहने वाली जनजातियों (ST) के लिए किया जाता रहा है। ‘गिरिजन’ का अर्थ होता है ‘पहाड़ों के लोग’। उत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में आज भी इन शब्दों का अनौपचारिक इस्तेमाल होता है, लेकिन आधुनिक प्रशासनिक ढांचे में इन्हें अब अपमानजनक या कमतर आंका जाने वाला माना जाने लगा है।
चीफ सेक्रेटरी ऑफिस द्वारा जारी इस निर्देश का पालन अब हरियाणा के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त निकायों को अनिवार्य रूप से करना होगा। यदि किसी पुराने फॉर्म या दस्तावेज़ में ये शब्द मौजूद हैं, तो उन्हें तुरंत संशोधित कर संवैधानिक शब्दावली (अनुसूचित जाति एवं जनजाति) से बदला जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस बदलाव से समाज के वंचित वर्गों को गरिमापूर्ण पहचान मिलेगी और सरकारी कार्यप्रणाली पूरी तरह से संविधान सम्मत बनेगी। यह फैसला राज्य में सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में मुख्यमंत्री सैनी की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
Congo New Government : अफ्रीकी देश कांगो गणराज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय की शुरुआत…
Iran Crypto Freeze Trump : मध्य-पूर्व में युद्ध की लपटों को शांत करने के लिए…
Jeffrey Sachs World War 3 : दुनियाभर में अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए प्रसिद्ध बुल्गारियाई…
West Bengal Election : लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल…
Vaibhav Suryavanshi Century : क्रिकेट जगत को एक नया 'वंडर किड' मिल गया है। महज…
Kolkata Slum Fire : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले से शनिवार को एक…
This website uses cookies.