Bangladesh Election 2026
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। देश से बाहर रह रही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी पार्टी, अवामी लीग, इस चुनाव में उतरती, तो जनता उन्हें भारी बहुमत से जिताती। हसीना ने कहा कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अवामी लीग की लोकप्रियता से डरकर उस पर प्रतिबंध लगाया है। उनके अनुसार, यह प्रतिबंध जनता की इच्छा को दबाने और ‘चुनावी डर’ को छिपाने का एक तरीका है।
एक हालिया साक्षात्कार में शेख हसीना ने तर्क दिया कि अवामी लीग के बिना कोई भी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष या भागीदारीपूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पर बैन लगने के कारण देश के लगभग 30 प्रतिशत से अधिक मतदाता वोटिंग प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। हसीना ने चेतावनी दी कि इस अधूरे चुनावी प्रोसेस से जो भी सरकार सत्ता में आएगी, उसके पास नैतिक और लोकतांत्रिक वैधता की कमी होगी। ऐसी सरकार जल्द ही गहरे राजनीतिक और संवैधानिक संकट में घिर जाएगी क्योंकि उसने बैलेट बॉक्स की वास्तविक लड़ाई का सामना नहीं किया है।
जुलाई आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई नई पार्टी (NCP) और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन पर भी हसीना ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की युवा पीढ़ी, जो बदलाव और खुशहाली की उम्मीद में NCP से जुड़ी थी, आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। हसीना के मुताबिक, जिस स्टूडेंट ग्रुप ने उन्हें सत्ता से हटाने के लिए संघर्ष किया, उसने अंततः उन्हीं कट्टरपंथी ताकतों (जमात) से हाथ मिला लिया, जो 1971 के मुक्ति संग्राम की विरोधी थीं। उन्होंने इस गठबंधन को ‘जमात की बी-टीम’ करार दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि नया राजनीतिक गठबंधन (NCP-जमात) बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करना चाहता है। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि अवामी लीग ने देश में घरेलू आतंकवाद को कुचला और एक सहिष्णु समाज का निर्माण किया था। अब जमात जैसी ताकतों के साथ मिलकर हिंसा और डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। हसीना का आरोप है कि यह नया समीकरण बांग्लादेश की दशकों की तरक्की को पीछे धकेल देगा और देश में धार्मिक कट्टरपंथ को फिर से बढ़ावा देगा।
खालिदा ज़िया के निधन के बाद BNP की कमान संभालने वाले तारिक रहमान की वापसी पर भी हसीना ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तारिक की वापसी किसी सुधार का संकेत नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल को और अधिक दूषित करेगी। तारिक, जो लंबे समय तक लंदन में निर्वासन में थे, उन पर हसीना सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। हसीना ने आरोप लगाया कि तारिक की विरासत हिंसा और चरमपंथी ताकतों के समर्थन पर टिकी है, इसलिए वह देश को सही नेतृत्व देने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
लेख के अंत में हसीना ने दावा किया कि उनके सूत्रों के अनुसार, BNP और जमात के कार्यकर्ता आम मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बंदूक की नोक पर वोट डलवाना ही ‘लोकतंत्र की वापसी’ है? अवामी लीग के मैदान में न होने से मुख्य मुकाबला अब जमात-NCP गठबंधन और BNP के बीच सिमट गया है। हसीना ने वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बिना समावेशी भागीदारी के यह चुनाव केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा, जिसका खामियाजा आने वाले समय में बांग्लादेश की जनता को भुगतना पड़ेगा।
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