Bangladesh Election 2026
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। देश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान होना प्रस्तावित है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के भीतर डर और अस्थिरता का माहौल साफ देखा जा रहा है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया जानकारियों के अनुसार, सरकार के कई कद्दावर मंत्री और सलाहकार चुनावी नतीजों के आने का इंतजार किए बिना ही देश छोड़कर भागने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग भविष्य की राजनीतिक करवट को लेकर बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस पूरी हलचल के पीछे एक बड़ी तकनीकी और कूटनीतिक रणनीति सामने आई है। दरअसल, बांग्लादेश में कई वरिष्ठ मंत्रियों और सलाहकारों ने अचानक अपने ‘राजनयिक पासपोर्ट’ (Diplomatic Passports) सरेंडर करने शुरू कर दिए हैं। सामान्यतः ये पासपोर्ट पद छोड़ने के बाद ही जमा किए जाते हैं, लेकिन मतदान से पहले ऐसा करना किसी बड़ी योजना की ओर इशारा करता है। सूत्रों का कहना है कि ये सलाहकार राजनयिक पासपोर्ट इसलिए जमा कर रहे हैं ताकि वे सामान्य पासपोर्ट प्राप्त कर सकें। राजनयिक पासपोर्ट पर कई देशों के वीजा नियमों में पेचीदगियां होती हैं, जबकि सामान्य पासपोर्ट पर निजी यात्रा के लिए वीजा मिलना अपेक्षाकृत आसान होता है। जैसे ही इन मंत्रियों को दूसरे देशों का वीजा प्राप्त होगा, वे देश से बाहर निकलने की तैयारी में हैं।
पासपोर्ट जमा करने वालों की सूची में कई रसूखदार नाम शामिल हैं। वित्त सलाहकार डॉ. सालेहुद्दीन अहमद का नाम इस मामले में सबसे ऊपर है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना राजनयिक पासपोर्ट सरेंडर करने की बात स्वीकार की है। उनके अलावा ऊर्जा एवं बिजली सलाहकार मोहम्मद फौजुल कबीर खान के भी पासपोर्ट जमा करने की खबरें पुख्ता हो चुकी हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने पत्रकारों से कहा कि कुछ सलाहकारों ने विदेश यात्रा के वीजा के लिए अपने पासपोर्ट सरेंडर किए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनकी पत्नी फिलहाल पद पर बने रहेंगे और उन्होंने अभी पासपोर्ट जमा नहीं किया है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले मतदान के नतीजे 15 फरवरी तक आने की संभावना है। अधिकांश चुनावी सर्वेक्षण और जनमत अनुमान तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं। ऐसे में यूनुस सरकार के वे सलाहकार, जो बीएनपी की विचारधारा के धुर विरोधी रहे हैं या जिन पर पार्टी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, अपनी सुरक्षा को लेकर गहरे संकट में हैं। इन सलाहकारों को डर है कि सत्ता बदलते ही उन पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है और उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है।
बीएनपी ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार मोहम्मद यूनुस के करीबी सलाहकारों को पद से हटाने की मांग की थी। इनमें रक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान, वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद, योजना सलाहकार वाहिदुद्दीन महमूद और कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल के नाम प्रमुखता से लिए गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद होने वाली संभावित राजनीतिक प्रतिशोध और कानूनी कार्रवाइयों से बचने के लिए ये मंत्री अब ‘सुरक्षित ठिकानों’ की तलाश में हैं। मतदान से पहले शुरू हुआ यह पलायन बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए एक नई और जटिल चुनौती पेश कर रहा है।
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